नगर पालिका परिषद में सीमा विस्तार के बाद वार्डों का परिसीमन किया गया। मकंद्रूगंज और धर्मशाला वार्ड के परिसीमन में मकंद्रूगंज के मतदाताओं का नाम धर्मशाला वार्ड में जोड़ दिया गया। जब मतदाता मकंद्रूगंज में मतदान करने पहुंचे, तो उनका नाम ही गायब था।
नगर निकाय चुनाव के पहले जिले में छह माह तक मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाने के बाद भी अधिकांश मतदाताओं का नाम गायब रहे। इससे मतदाताओं को निराश होकर लौटना पड़ा। मकंद्रूगंज और धर्मशाला वार्ड के सीमांकन में हुई गड़बड़ी से अधिकांश मतदाताओं को बगैर मत दिए ही वापस होना पड़ा।
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नगर पालिका परिषद में सीमा विस्तार के बाद वार्डों का परिसीमन किया गया। मकंद्रूगंज और धर्मशाला वार्ड के परिसीमन में मकंद्रूगंज के मतदाताओं का नाम धर्मशाला वार्ड में जोड़ दिया गया। जब मतदाता मकंद्रूगंज में मतदान करने पहुंचे, तो उनका नाम ही गायब था। इसलिए वह बगैर मतदान किए ही घर लौट आए। बाद में पता चला कि मतदाताओं का नाम धर्मशाला वार्ड में हैं। हालांकि कुछ मतदाताओं ने बूथ पर पहुंचकर मतदान किया।
रानीगंज के प्राइमरी स्कूल बरहदा और सराय सुल्तानी वार्ड के कई लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं था। मानिकचंद्र का आरोप है कि उनके घर में दस मतदाता है, मगर मतदाता सूची में सिर्फ एक नाम है। सूरज मिश्र, महेश नारायण, शेष नारायण, संजू, संदीप तिवारी का भी नाम गायब था। नगर पंचायत डेरवा के हरिशंकर पांडेय का आरोप है कि उनके पूरे परिवार का नाम मतदाता सूची से गायब कर दिया गया है।
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बृहस्पतिवार को बूथ पर वह परिवार के साथ मतदान करने पहुंचे, तो पता चला कि उनका नाम ही मतदाता सूची में नहीं है। इससे निराश होना पड़ा। फिलहाल इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है कि जिला प्रशासन के प्रयास के बावजूद मतदाताओं का नाम कैसे छूट जाता है।