बोलेरो, ट्रैक्टर, कार से चलने वाले लोग अगर कोटेदारों से सस्ता राशन ले रहे हैं, तो ऐसे लोगों को योजना से बाहर किया जाएगा। इन लोगों के स्थान पर तीन माह से आवेदन करने वाले को लाभ दिया जाएगा। अपात्रों की जांच के लिए अगले माह में जिले में अभियान चलने वाला है। जिसमें वास्तविक पात्रों को योजना का लाभ दिया जाएगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत नए कार्ड के लिए आवेदन करने वाले 5326 आवेदकों के लिए राहत भरी खबर है। जुलाई माह में अपात्रों को योजना से बाहर करने के लिए जिले के 17 विकास खंडों में अभियान चलेगा।
जिला आपूर्ति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास में ऐेसे जिले में बने 5.80 लाख राशनकार्डों की जांच की जाएगी। इस अभियान में उन लोगों को भी बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, जिन्होंने शहरों में राशन कार्ड बनवा रखा था, मगर इन दिनों में गांव में रह रहे हैं। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर गांव में आ गए हैं। इसमें अधिकांश ऐेसे हैं, जिनका शहर में भी कार्ड बना हुआ था। ऐेसे में वह सिर्फ एक जगह ही राशन ले सकते हैं। विभाग का मानना है कि कई राशनकार्ड धारक ऐसेे हैं, जो तीन माह से राशन नहीं ले रहे हैं। इन लोगों का राशनकार्ड भी जल्द ही निरस्त कर दिया जाएगा।
राशनकार्ड में बाहरी लोगों के होने पर कोटेदार पर गिरेगी गाज जिले की कुछ ग्राम पंचायतों में कोटेदारों ने अपने रिश्तेदारों के नाम राशनकार्ड बनवा रखा है। रिश्तेदार कभी राशन लेने नहीं आते हैं, ऐेसे में कोटेदार प्रॉक्सी विधि से राशन को ड्रा कर लेते हैं। ऐेसे लोगों को सबक सिखाने के लिए विभाग की पहल तेज होगी।
बार-बार एक ही व्यक्ति को प्रॉक्सी से दिया जाता है राशन
जिले के अधिकांश कोटेदार ऐसे हैं, जो शत-प्रतिशत अंगूठा लगाकर राशन दे रहे हैं, मगर कुछ ऐेसे हैं जो प्रॉक्सी से राशन दे रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिसे एक बार प्राक्सी से राशन से दिया, उसी को बार-बार प्रॉक्सी से राशन दिया गया है। ऐसे लोगों की जांच होगी, दोषी मिलने पर कोटेदारी भी जा सकती है।
राशनकार्डों के सत्यापन का अभियान चलाकर ऐसे अपात्रों को बाहर किया जाएगा, जो अमीर होते हुए गरीब बन गए हैं। इस अभियान के चलने से उन लोगों का राशनकार्ड बनाने का मौका मिलेगा, जो आवेदन करके इंतजार कर रहे हैं।
सुनील कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी