जिले के एक हजार से अधिक आबादी वाले गांवों के लिए खुशखबरी है। इन गांवों में एलटी लाइन के तारों का मकड़जाल जल्द दूर होगा। ऐसे गांवों में एलटी लाइन की आपूर्ति केबिल के जरिए होगी। पहले चरण में जिले के 801 गांवों में केबिल लगाए जाएंगे। विभाग ने गांवों की सूची तैयार कर ली है। बजट भी पास हो गया है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही कार्य शुरू होगा।
जिले में चार विद्युत वितरण पारेषण खंड हैं। रानीगंज, लालगंज, सदर व कुंडा। इसके तहत 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। शहर में 24 व गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है, लेकिन खस्ताहाल व्यवस्था के कारण गांवों में रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल पाती है। आपूर्ति में सबसे ज्यादा परेशानी एलटी लाइनों के जर्जर होने से आती है। गांवों में एलटी लाइनों की स्थिति बहुत खराब है।
तार वर्षों से नहीं बदले गए हैं। कई जगहों पर तार जमीन तक छू रहे हैं। गर्मी के दिनों में तार टूटकर गिरने से आए दिन आग की घटनाएं होती हैं। इसे देखते हुए बिजली विभाग ने गांवों में तारों की जगह केबिल दौड़ाने का फैसला किया है। इससे गांवों में तारों का मकड़जाल खत्म हो जाएगा। विभाग गांवों की एलटी लाइनों को केबिल के जरिए संचालित करेगा। केबिल में संचालित होने वाले एलटी लाइन बारिश, आंधी में सुरक्षित रहेगी।
कटियामारी पर लगेगी लगाम, कम होगा लाइन लॉस
गांवों में बिजली चोरी का लंबा खेल होता है। बिजली चोरों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, मगर इसमें सफलता नहीं मिलती। अब केबिल से एलटी लाइन संचालित होने से गांवों में बिजली चोरी के खेल पर विराम लग जाएगा। इसके लिए अलावा लाइन लॉस में भी कमी आएगी।
जिले के 801 गांवों में केबिल से एलटी लाइन संचालित की जाएगी। इसके लिए बजट स्वीकृत हो गया है। जल्द ही कार्य शुरू होगा। इससे गांवों की बिजली व्यवस्था में परिवर्तन दिखेगा। सत्यपाल, अधीक्षण अभियंता