जेठवारा। कटरा गुलाब सिंह में चौकी कागजों पर चल रही है। तीन साल गुजर गए, मगर चौकी के लिए भवन का निर्माण नहीं हो सका है। जिसका नतीजा है कि चौकी के नाम पर तैनात दरोगा और सिपाही मोबाइल रहते हैं। जहां दरोगा सिपाही बैठ गए वहीं चौकी हो जाती है। चौकी का स्थायी कार्यालय नहीं होने से पुलिस स्टॉफ और फरियादी दोनों परेशान हैं।
सुरक्षा के मद्देनजर करीब तीन साल पूर्व शासन ने जेठवारा थाना क्षेत्र के कटरागुलाब सिंह में चौकी निर्माण का आदेश एसपी को जारी किया। इसके बाद चौकी के नाम पर एक दरोगा और चार सिपाही तैनात किए जाने लगे। मगर स्थायी भवन का निर्माण नहीं हो सका। जिसका नतीजा है कि थाने से चौकी का स्टॉफ रवाना होकर कहीं चाय की दुकान पर तो कहीं मोटर साइकिल किसी के घर के बाहर बैठकर कामकाज निपटाता है।
चौकी का स्थायी भवन नहीं होने से दरोगा और सिपाही क्षेत्र में घूमते रहते हैं या फिर थाने पर रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र के पीड़ित को व्यक्ति को दरोगा तक पहुंचने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्थायी भवन नहीं होने से दरोगा और सिपाही भी लापरवाही से बाज नहीं आते। जाहिर है जब कार्यालय नहीं है तो फिर वहां से गायब रहने पर अफसर कार्रवाई भी नहीं कर पाते हैं।
जेठवारा से करीब 12 किमी दूर प्रतापगढ़- इलाहाबाद के बार्डर पर कटरागुलाब सिंह स्थित है। इस चौकी के क्षेत्र में पूरेसुखदेव, नागापुर, छतौना, बासू, गंभीर, गौरा, हिन्दूपुर, पूरेशुखदेव, बछुआ, मोतीलाल, जगदीशपुर सहित दो दर्जन से अधिक गांव आते है। गांवों की सुरक्षा व शांति व्यवस्था स्थापित करने का जिम्मा उठाने के लिए जिम्मेदार दरोगा और सिपाही एक अदद छत को परेशान हैं।
हाल फिलहाल, कटरागुलाब सिंह चौकी का बोर्ड एक बाइक एजेंसी के सामने लगा है। पीड़ित पुलिस को खोजते हुए एजेंसी के पास पहुंचता है तो वहां एजेंसी के सेल्समैन बाइक खरीदने के लिए बुलाने लगते हैं। इससे वह परेशान हो जाता है। फरियादी को वापस लौटना पड़ता है।
विभाग की ओर से न तो कोई किराया मिलता है और न ही भवन मिला है। कभी बाजार की दुकान पर तो किसी समय बाइक एजेंसी पर बैठकर कामकाज निपटाया जाता है। मेरे पास आने वाले लोगों की पूरी मदद की जाती है।
क्षत्रपाल सिंह
कटरागुलाब सिंह चौकी इंचार्ज