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Pratapgarh News: मकान बनवाने के लिए पूर्व कार्यवाहक सीएमओ ने रखे थे रुपये

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अंबेडकर नगर में वर्ष 2014 में तैनात रहे कार्यवाहक सीएमओ डॉ.ब्रह्मनारायण तिवारी के आवास से 11 साल बाद मिले 22.48 लाख रुपये की गुत्थी सुलझ गई है। पैतृक गांव में मकान बनवाने के लिए रुपये जमा किए थे। हालांकि घर आने के दो दिन पहले ही उनकी मौत हो गई। विवाद की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उनके आवास में ताला बंद करा दिया। जिसके कारण परिवार के सदस्य आवास के भीतर दाखिल नहीं हो सके।
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दरअसल पूर्व कार्यवाहक सीएमओ आसपुर देवसरा के रामगढ़ा के रहने वाले थे। उनके निधन से दो वर्ष पहले उनकी पत्नी गौरा की मौत हो चुकी थी। उनके छोटे भाई जगदीश तिवारी की भी 32 वर्ष की उम्र में निधन हो चुका है। चूंकि कार्यवाहक सीएमओ निसंतान थे, इसलिए भाई की मौत के बाद भतीजे भानु प्रताप तिवारी और शशांक तिवारी की वह परवरिश करते रहे।
भानु प्रताप के अनुसार वह अवकाश लेकर एक फरवरी को घर आने वाले थे। ताकि मकान का निर्माण करा सकें। इसके लिए ही अपने आवास में रुपये जमा कर रखे थे। घर आने से पहले ही 29 जनवरी 2014 को वह अपने सरकारी आवास में मृत मिले थे। प्रशासन ने भी उनकी मौत को संदिग्ध मानते हुए कमरे में ताला लगा दिया। भतीजे भानु ने बताया कि 11 साल बाद तीन जुलाई 2025 को आवास का ताला स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी में खोला गया।
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छानबीन के दौरान आवास से 22.48 लाख रुपये व कमरे से गृहस्थी का सामान मिला है। बड़े पिता की ससुराल जनपद जौनपुर के सुजानगढ़ थाना क्षेत्र के प्रेम का पूरा में है। उनकी मौत के बाद उनके साले अरविंद दुबे ने एक वसीयत न्यायालय में प्रस्तुत कर वाद दायर कर रखा है। जो न्यायालय में विचाराधीन है। पूर्व कार्यवाहक सीएमओ के निधन के बाद उनका पुराना मकान जर्जर हो चुका है। भानु घर गृहस्थी का काम संभालते हैं। जबकि आर्थिक स्थिति बेहतर न होने के कारण शशांक मुंबई में प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं।


स्वास्थ्य विभाग से मिलना है 1.5 करोड़ की राशि
अंबेडकर नगर के पूर्व कार्यवाहक सीएमओ रहे ब्रह्मनारायण तिवारी की मौत के बाद विभाग ने उनके सेवाकाल का भुगतान नहीं किया है। भतीजे भानु का कहना है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को देना है। कानूनी अड़चनों के कारण अभी भुगतान नहीं हो सका। जबकि उनके बड़े पिता ने पहले ही दोनों भाइयों को अपना वारिस घोषित कर दिया था। जिसे पूरे गांव व रिश्तेदार भी जानते हैं।
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