हॉकी में देश के लिए मेडल जीतने का सपना संजोए जिले के खिलाड़ी पसीना बहा रहे हैं लेकिन उन्हें गोल करने के लिए मैदान नहीं मिल रहा है। स्टेडियम में सुविधाएं न मिलने से खिलाड़ियों ने निजी एकेडमी का रुख किया। लेकिन, यहां एस्ट्रोटर्फ तो छोड़िए समतल मैदान भी नहीं है। सीमित संसाधनों में खिलाड़ी हुनर को तराश रहे हैं।
स्टेडियम में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने पर जिले के करीब 30 हॉकी खिलाड़ियों ने निजी हॉकी एकेडमी में दाखिला लिया। उन्हें पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी अनवर खान खेल की बारीकियां सीखा रहे है लेकिन यहां भी खिलाड़ियों की दिक्कतें कम नहीं हुईं। जीआईसी मैदान में रोजाना दो से तीन घंटे पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों को आज भी अच्छे और समतल मैदान की दरकार है।
जीआईसी मैदान पर होने से वाले राजनीतिक व सांस्कृतिक आयोजन भी खिलाड़ियों के अभ्यास में बाधा पहुंचती है। साथ ही मवेशियों का जमावड़ा भी परेशानी का सबब है।
कोच अनवर खान ने बताया कि हॉकी की उभरती प्रतिभाओं को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सोसाइटी में आने वाले खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास कराया जाता है। खेल उपकरण निशुल्क प्रदान किए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद कई सुविधाएं मिलनी आवश्यक हैं।
वर्जन
जीआईसी मैदान में आए दिन राजनीतिक दल की रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रदर्शनी का आयोजन होता है। इससे अभ्यास में परेशानी होती है। मैदान को दुरुस्त करने में खिलाड़ी मेहनत करते हैं। गर्मी के दिनों में मैदान सूख जाता है।
अदनान अहमद, हॉकी खिलाड़ी
जीआईसी मैदान अभ्यास के लिए पर्याप्त है लेकिन मवेशियों के आ जाने दिक्कत होती है। बार-बार उन्हें मैदान से दूर करना पड़ता है।
मो. शोएब, हॉकी खिलाड़ी
मैदान समतल नहीं है। घास न होने से धूल के कण हवा में उड़ते हैं और आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस वजह से बॉल को हिट करने में परेशानी होती है। कई बार तो धूल की वजह से बॉल दिखती तक नहीं है। - ओम राव, हॉकी खिलाड़ी
वर्जन:-
स्टेडियम में मैदान छोटा होने के कारण हॉकी खिलाड़ी जीआईसी मैदान में अभ्यास करते हैं, खिलाड़ियों को खेल उपकरण मुहैया कराए जाते हैं। जीआईसी का मैदान खराब है। स्टेडियम के मैदान में सुविधाएं बढ़ाने और विस्तारीकरण के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
- पूनमलता राज, जिला क्रीड़ाधिकारी