परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए शासन के आदेश पर कायाकल्प अभियान चलाने के बाद भी जिले के ज्यादातर विद्यालयों की तस्वीर नहीं बदल सकी है। कहीं बाउंड्री तो कहीं शौचालय गायब हैं। रसोई घर, स्टोर रूम व भवन भी ठीक नहीं हो पाए हैं।
जिले में कुल 2464 प्राइमरी व मिडिल स्कूल संचालित हैं। शासन ने इन स्कूलों को कायाकल्प योजना के तहत चमकाने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि अभी तक जिले के 534 स्कूलों का कायाकल्प के तहत सुंदरीकरण किया गया है। कायाकल्प योजना के तहत 14वें वित्त के बजट से स्कूलों में निर्माण के साथ ही अन्य कार्य कराए जाने थे।
इस योजना को बेसिक शिक्षा विभाग और पंचायती राज विभाग के समन्वय से वित्तीय वर्ष में 31 मार्च तक पूरा होना था। विद्यालयों का 14 बिंदुओं पर सुंदरीकरण कराया जाना था। लापरवाही के कारण कहीं टाइल्स, कहीं बाउंड्री तो कहीं शौचालय नहीं बने। रसोई घर, स्टोर रूम, भवन भी जर्जर हैं, मगर कागजों में काम पूरा दिखाकर वाहवाही लूटी जा रही है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कराए जाने थे ये काम
बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनने थे। कक्षों की फर्श पर टाइल्स लगने थे। रसोई घर का निर्माण, प्रसाधनों में जलापूर्ति, पेयजल, श्यामपट्, विद्यालय की रंगाई-पुताई, मल्टीपल हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा कक्ष में उपयुक्त वायरिंग, विद्युत उपकरण व्यवस्था, दिव्यांगों के लिए रैंप और शौचालय।
कादीपुर का विद्यालय पड़ा है बदहाल
सदर विकासखंड के कादीपुर गांव में प्राइमरी व मिडिल स्कूल संचालित होता है। दोनों विद्यालयों की दशा खराब है। स्कूल में चहारदीवारी नहीं है। दरवाजे टूटे पड़े हैं। शौचालय बदहाल हैं। स्कूल की रंगाई-पुताई भी नहीं हुई है। बच्चों के डेस्क-बेंच को एक कमरे में बंद कर दिया गया है। जर्जर भवन के चलते शिक्षक व शिक्षिकाएं बाहर बैठे मिले।
जगदीशगढ़ में भी जर्जर भवन में होती है पढ़ाई
बाबा बेलखरनाथधाम के जगदीशगढ़ में स्थित प्राइमरी विद्यालय देखने पर एहसास होता है कि शासन की प्राथमिकता वाली योजना किस तरह संचालित हो रही है। विद्यालय का भवन पूरी तरह से बदहाल है। रंगाई-पुताई तक नहीं हुई है। हालांकि अतिरिक्त कक्ष नए बने हैं।
कायाकल्य योजना के तहत स्कूलों की काया बदलने के लिए काम जारी है। अभी जिन विद्यालयों में काम पूरा नहीं हुआ है, उनके लिए पंचायती राज विभाग से पत्राचार किया गया है। अशोक कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी