बेल्हा में शिमला-मसूरी जैसी ठंड
2 डिग्री पर पहुंचा पारा, टूटा आठ साल का रिकार्ड, दिनभर धुंध, नहीं दिखा सूरज, छूटी कंपकंपी
शरीर में चुभ रहीं बर्फीली हवाएं, अधिकतम तापमान भी 10.03 पर पहुंचा
प्रतापगढ़। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं ने बेल्हा की फिजाओं में बर्फ घोल दिया है। कोहरा, शीतलहर व गलन के बीच कड़ाके की ठंड ने शनिवार को आठ साल का रिकार्ड तोड़ दिया। न्यूनतम तापमान लुढ़ककर दो डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। शीतलहर के कहर से लोग दिनभर कांपते रहे। रजाई से निकलते ही हाथ-पांव ठंडे पड़ने लग रहे थे। घरों में लोग अलाव के पास दुबके रहे। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश दुकानें बंद रहीं। चौराहों व सड़कों पर जगह-जगह दिनभर अलाव धधकते रहे। सड़कों पर इक्का- दुक्का लोग ही नजर आए। दिनभर बर्फीली हवाएं कंपाती रहीं। शहर से लेकर गांव तक आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।
पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी से बेल्हा में भी कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। वर्षों बाद जिले के लोग ऐसी ठंड झेल रहे है। तापमान लुढ़कने से अब यहां भी पहाड़ों जैसे हालत बनने लगे हैं। शनिवार की ठंड ने आठ साल का रिकार्ड तोड़ दिया। सुबह की शुरुआत घने कोहरे व बर्फीली हवाओं के बीच हुई। पश्चिमी हवाओं से गलन का असर इतना तेज था कि रजाई से निकलते ही लोग कांपने लगते। हाथ-पांव ठंड पड़ जा रहे थे। वातावरण में कोहरे ने दिनभर असर बनाए रखा। दोपहर तक इसका असर तेज रहा। शहर में सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसर रहा। कंपनी बाग, स्टेशन रोड, व सड़कों पर मार्निंगवाक करने वाले लोग नहीं दिखे। ठंड इस कदर थी कि लोग रजाई में दुबके रहे। सुबह 9 बजे के बाद लोग बाहर निकले, लेकिन इसके बाद भी ठंड के तेवर बरकरार रहे। जगह-जगह अलाव जलते रहे। कुछ दुकानें खुली भी थीं तो वहां ग्राहक नहीं थे। दुकानदार बाहर निकलकर अलाव के पास दुबके रहे। रोजमर्रा के कामकाज को निकलने वाले लोग सड़कों पर जल रहे अलाव से राहत पाने का प्रयास कर रहे थे। दिनभर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। ठंड का असर देख लोग घरों से बाहर नहीं निकले। घरों में अलाव के सहारे दिन बिताया। इधर शाम होने पर ठंड में और भी इजाफा हो गया। शाम पंाच बजते ही दुकानें बंद हो गईं। लोग घरों में दुबक गए। कमोवेश यही हाल रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर के ग्रामीण इलाकों का भी रहा। शहर से लेकर गांव तक जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। मौसम विभाग के वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि 18 दिसंबर वर्ष 2011 में अधिकतम तापमान 11.05 व न्यूनतम 2.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। 28 दिसंबर शनिवार को कड़ाके की ठंड से यह रिकार्ड टूटा है। उन्होंने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 10.03 व न्यूनतम 2.0 डिग्री सेल्सिएस रिकार्ड किया गया।
बर्फीली हवाओं से तीन दिन के भीतर पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सिएस से लुढ़ककर 10.03 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जबकि न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस से लुढ़ककर 2.0 डिग्री सेल्सिएस पर पहुंच गया है। तापमान लुढ़कने से लगातार ठंड में इजाफा हो रहा है।
मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि अभी तीन से चार दिन तक मौसम के यही हालात रहेंगे। तीन से चार दिन तक लोगों को ठंड का सामना करना होगा। शीतलहर का कहर बना रहेगा। कोहरे का भी असर रहेगा। हवाओं की दिशा बदलने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
शीतलहर व गलन के बीच कड़ाके की ठंड से अब आलू की फसल पर पाला पड़ने का संकट मंडरा रहा है। फसल की पैदावार को लेकर किसानों में गहरी निराशा देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि ठंड अधिक बढ़ने से आलू की फसल पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा। पाला पड़ने से फसल नष्ट हो सकती है। इसके अलावा सरसों की फसल पर माहू रोग का खतरा मंडरा रहा है। कोहरा होने से तैयार हो रही सरसों की अगैती फसल माहू रोग से ग्रहित हो सकती है। इसे लेकर किसान परेशान हैं। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी सिंह ने बताया कि अभी फिलहाल आलू व सरसों की फसल पर उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन यदि इसी तरह मौसम बना रहा तो आगे दिक्कत आएगी।
शनिवार को सुबह पड़ा घना कोहरा।- फोटो : PRATAPGARH
शनिवार को कड़ाके की ठंड में जिला अस्पताल में अलाव के समीप बैठे तीमारदार।- फोटो : PRATAPGARH