प्रतापगढ़। सई का जलस्तर घट रहा है, मगर तटीय इलाकों में रहने वालों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। सदर बाजार मोहल्ले के लगभग 80 घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। सई और चमरौधा नदी का पानी लगभग चार दर्जन गांवों में घुसा है। बुधवार को फिर बरसात होने से कच्चे घरों के गिरने का सिलसिला जारी है। सई के उफान से तटीय इलाकों में सप्ताह भर से फसलें डूबी हुई हैं। तिल्ली, उड़द, मूंग की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
सई नदी के किनारे स्थित मोहल्लों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। बेल्हादेवी घाट स्थित सदर बाजार के लगभग 80 परिवार सप्ताह भर पहले ही घर छोडक़र गांव चले गए हैं। आलम यह है कि अभी भी लगभग 11 फीट पानी भरा हुआ है। दहिलामऊ के चांदमारी की नई बस्ती में पानी भर जाने से लगभग 14 घरों में तीन दिन से ताला लटक रहा है। घरों के अंदर पानी भरा है।
ग्रामीण इलाकों की हालत और भी खराब है। सई के तटीय इलाकों में ईशीपुर, कारीघाट, ढेकाही, जहरगो, गडइचकदेइया, राजापुर, रसूलपुर गुलरहा, रामनगरभोजपुर, पीरूपुर, कोलगढ़ा सहित लगभग चार दर्जन गांवों में पानी घुसा हुआ है। इससे लोगों का निकलना जहां मुश्किल हो गया है, वहीं सप्ताह भर से फसलें पानी में डूबी हुई हैं। उड़द, मूंग, तिल्ली की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। किसान जलस्तर घटने का इंतजार कर रहे हैं, मगर बुधवार से प्रारंभ हुई बरसात से और संकट गहरा गया है।
डूब गया ढेकाही घाट का पुल
सई नदी के ढेकाही घाट पर बना पुल सप्ताह भर से पानी में डूबा हुआ है। इससे राहगीर रास्ता बदलकर आ-जा रहे हैं। राम-राम चौराहा से गडईचकदेईया गांव को जोड़ने वाला रास्ता सप्ताह भर से बंद है। इस मार्ग पर लगभग छह फीट पानी भरा हुआ है। इससे गांव के लोगों को सात किमी की परिक्रमा करनी पड़ रही है।
कच्चे घर गिरने का नहीं थमा सिलसिला
बरसात होने और कच्चे मकान गिरने का सिलसिला अभी जारी है। सदर विकास खंड के पूरेभैया गांव निवासी हरिबख्श सिंह और गड़वारा के पूरे गरीबदास गांव निवासी श्रीराम हरिजन, विनोद शुक्ला, शुकुलपुर के बृजमोहन शुक्ल, विजय शुक्ल का मकान धराशाई हो गया। मानधाता विकास खंड के घाटमपुर की विधवा शोभा देवी पत्नी राजेंद्र सिंह का मकान बुधवार की सुबह जमीदोंज हो गया। विधवा अपने पांच बच्चों के साथ जर्जर मकान में रहती थी। मगर मकान गिरने से वह पूरी तरह बेघर हो गई है।