परानूपुर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को कथावाचक राजन महाराज ने बताया कि हम जिस प्रकार का जीवन जीते हैं, वैसे ही हमारे घर का वातावरण निर्मित होता है।
उन्होंने रामकथा को संतों का कुंभ बताया। श्रोताओं से आह्वान किया कि वे भगवान शंकर की गलत छवियों से बचें। भगवान शंकर दिन-रात राम नाम का अमृत पान करते हैं, वे भला चिलम कैसे पी सकते हैं। अगर आपके घरों में ऐसी तस्वीरें हों तो उन्हें श्रद्धा पूर्वक गंगा में प्रवाहित कर दें।
कथा विश्राम पर अजीत पांडेय, पुष्पा पांडेय, आयोजक आनंद पांडेय, दीपशिखा पांडेय, प्रधान आनंददेव पांडेय, गायक अनुराग, पंपोष प्रतापगढ़ी ने आरती-पूजन किया। कथा प्रारंभ होने से पहले व्यासपीठ की पूजा-अर्चना अयोध्या के बाबा राजकुमार दास, बीदास, कुलदीप महाराज, राघव महाराज, स्वामी नंद महाराज, स्वामी विनम्यानंद महाराज, बनारस के अजीत गुप्ता ने की। कथा में एमएलसी अरविंद त्रिपाठी उपस्थित रहे।
राजन महाराज से मिले पदाधिकारी
श्रीरामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने को लेकर श्रीरामचरित मानस राष्ट्रीय ग्रंथ संरक्षा अभियान समिति के राष्ट्रीय संयोजक ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने पदाधिकारियों ने राजन महाराज से मुलाकात की। साथ ही उन्हें बाबा घुइसरनाथ का चित्र व महोत्सव दर्पण भेंट किया।