बेसिक शिक्षा विभाग में मानक की अनदेखी करके शिक्षकों की तैनाती की गई है। सदर विकास खंड में ऐसे भी स्कूल हैं जहां बच्चों की संख्या मात्र 51 और अध्यापकों की संख्या दस-दस है। जबकि शासन का मानक है कि 30 बच्चों पर ही एक शिक्षक की तैनाती हो सकती है। मगर विभाग इस पर अमल नहीं कर रहा है।
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती में व्यापक खेल हुआ है। जिस स्कूल में बच्चों की संख्या कम है, वहां भी आवश्यकता से अधिक अध्यापकों की तैनाती कर दी गई है। सदर विकास खंड के मिडिल स्कूल बराछा में 51 बच्चे नामांकित हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए यहां दस शिक्षकों की तैनाती की गई है।
सदर विकास खंड के इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल शंकरगंज में आठ अध्यापकों की तैनाती की गई है। जबकि एक स्कूल में अधिकतम पांच शिक्षकों का ही मानक निर्धारित किया गया है। प्रतापगढ़-लखनऊ राजमार्ग पर स्थित लक्ष्मणपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल अजगरा प्रथम में नौ अध्यापिकाओं की तैनाती है। यहां भी मानक की अनदेखी की गई है। अफसरों के संज्ञान में मामला होने के बाद भी मानक के विपरीत तैनात अध्यापकों को अन्यत्र तैनात नहीं किया जा रहा है।
इंग्लिश मीडियम स्कूलों में तैनात हैं हिंदी मीडियम के अध्यापक
जिले के इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हिंदी मीडियम के अध्यापक तैनात हैं। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग ने जिन स्कूलों का चयन अंग्रेजी माध्यम के रूप में किया, उसमें अंग्रेजी माध्यम के अध्यापकों की तैनाती तो कर दी गई, मगर दो साल का समय बीतने के बाद भी उन स्कूलों से हिंदी मीडियम अध्यापकों को अभी तक हटाया नहीं गया है।
जिस स्कूल में मानक से अधिक अध्यापकों की तैनाती हुई है उन लोगों का समायोजन किया गया था, मगर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश जारी होने के बाद तैनाती रोक दी गई है। जल्द ही न्यायालय का हस्तक्षेप खत्म होते ही आवंटित स्कूलों में तैनाती दी जाएगी। अशोक कुमार सिंह, बीएसए।