इस वर्ष भयंकर गर्मी झेलने को तैयार रहिए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ठंड कम पड़ने के कारण गर्मी का असर ज्यादा होगा। इसके संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं। दो मार्च को तापमान में हुई बढ़ोत्तरी ने सात साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पल-पल हवाओं के बदलने का दौर जारी रहा, तो होली से पहले बरसात भी हो सकती है।
इस बार जिले के लोगों को गर्मी खूब सताएगी। एक मार्च से अचानक मौसम के परिवर्तित होते ही गर्मी का असर तेज हो गया है। एक मार्च को न्यूनतम तापमान 13.8 और अधिकतम तापमान 32.5 था। दो मार्च को न्यूनतम 15.5 और अधिकतम 31.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी से सुबह और शाम की ठंड गायब हो गई है। शहर में लोगों को पंखा चलाना पड़ रहा है। इससे जहां बूढ़े और बच्चे जुकाम- बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि इस वर्ष भीषण गर्मी पड़ेगी। इसकी प्रमुख वजह पर्याप्त ठंडी नहीं पडना बताया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना के मुताबिक, जिले में ठंडी तो पड़ी, मगर बीते वर्षों में सर्दी का असर अक्तूबर से होली तक रहता था। इस बार दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में ही पर्याप्त ठंडी पड़ी। इसके बाद सर्दी का सितम देखने को नहीं मिला। इससे इस वर्ष गर्मी अधिक पड़ने की संभावना है। होली से पहले मौसम में आए बदलाव से भी इसका आंकलन किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में गर्मी के तेवर और तीखे हो सकते हैं।
प्रभावित हो सकता है गेहूं का उत्पादन
मौसम में होने वाले परिवर्तन से सबसे बड़ी असर गेहूं की फसल पर पड़ेगा। ठंड कम होने से गेहूं की पछेती फसलों में पड़ने वाला दाना हल्का हो जाता है। तेज हवाओं के चलने और अधिक गर्मी पड़ने के कारण खेतों से नमी गायब हो जाती है। जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए अधिकतम 20.0 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर ही गेहूं के दाने का भरपूर विकास होता है।