देश भर में हो रहे ट्रेन हादसों को रोकने के प्रति गंभीर रेलवे इस समय सेफ्टी पर बड़ा जोर दे रही है। इसके लिये जगह-जगह कार्यशालाएं और जागरूकता जैसे अभियान भी चलाये जा रहे हैं। मगर सेफ्टी पर मंडराने वाले खतरे से निपटने के लिये झंडी, बत्ती, वाकी-टाकी जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों का प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर अभाव बना हुआ है। राड और लाठी से पीटकर सिग्नल को चलाया जा रहा है। सामानों के अभाव में आये दिन प्वाइंट फेल की समस्या से कर्मचारी डेली जूझ रहे हैं। गुरुवार को स्टेशन पर पावर केबिन के हाल में सेफ्टी पर आयोजित सेमिनार में लखनऊ से आये बड़े अफसरों से कर्मचारियों ने इन चीजों की मांग की तो उनको बोलने नहीं दिया गया। अफसरों ने उनकी आवाज को दबा दिया। कार्यशाला पर नाश्ते और भोजन पर हजारों का बिल बनाने के बाद अफसर बिना कुछ सुने ही चलते बने। बेचारे कर्मचारी अपना दुखड़ा लेकर रह गये।
प्रतापगढ़ रेलेवे स्टेशन पर सेफ्टी खतरे में है। कर्मचारियों को बिना हथियार दिये ही उन पर सेफ्टी के दुश्मनों से निपटने की जिम्मेदारी डाली दी गई है। बत्ती, झंडी, वाकी-टाकी, सिग्नल के सामान पर्याप्त नहीं हैं। कर्मचारियों की मानें तो खींचतान कर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। डायमंड रेलवे क्रासिंग पर डेली प्वाइंट फेल रहता है। कर्मचारी रॉड और बांस से प्वाइंट पर मारता है तब जाकर प्लेटफार्म एक का सिग्नल गिरता है। इंन और आउटर सिग्नल भी जाम रहते हैं। सेफ्टी में जरूरी चीजों की मांग कर्मचारी काफी समय से कर रहे हैं। मगर अफसर इनकी मांगों पर ध्यान नहंी दे रहा है। कार्यशाला में भी कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं रखी। मगर उस पर ध्यान नहीं दिया गया। ट्रेन हादसों को रोकने के लिये रेलमंत्रालय ने अपने भले ही अपना कोश खोल दिया है। मगर अफसर इसको गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। गुरुवार को सेफ्टी की सेमिनार में केवल औपचारिकता ही निभाई गई। किसी ठोस मुद्दे को लेकर पहल नहीं की गई है। लखनऊ से आये सेफ्टी के अफसर हवा-हवाई भाषण दिये और लजीज भोजन का लुत्फ उठाने के बाद चलते बने।