बेल्हा देवी मंदिर में सादगी के साथ विवाह करते प्रोफेसर प्रीती व प्रोफेसर शिव प्रताप।
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न बैंडबाजा न बारात। न हाथी-घोड़े न आतिशबाजी और न ही चमचमाती गाड़ियों का लंबा काफिला। डीजे पर नाचने वाले बारातियों का शोर भी नहीं। आज के दौर की शादियों में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन बेल्हा देवी मंदिर में बुधवार को एक ऐसी ही शादी हुई, जिसमें बेहद सादगी से रस्में निभाने के साथ परिवारीजनों और कुछ चुनिंदा मित्रों के बीच पीबीपीजी कालेज प्रतापगढ़ सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. शिवप्रताप सिंह मुरादाबाद में अपने ही पद पर काम करने वाली प्रीती सिंह के साथ परिणय सूत्र में बंध गए। देवी मंदिर में शादी के बाद मित्रों शुभचिंतकों को भोज भी दिया गया। यह शादी बुधवार को शहर में चर्चा का विषय बनी रही। दहेज और फिजूलखर्ची रोकने का संदेश देने के लिए दोनों शिक्षकों ने शादी करने का यह तरीका अपनाया।
प्रतापगढ़ सिटी स्थित पीबीपीजी कालेज के हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सदर तहसील के अतरसंड कोहड़ौर निवासी डॉ. शिवप्रताप सिंह को हाल ही में उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग से तैनाती मिली थी। उनकी शादी मुरादाबाद जिले के हिंदू डिग्री कालेज में हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर जौनपुर निवासी डॉ. प्रीती सिंह के साथ तय हुई थी।
विवाह की तिथि तय होने के बाद दोनों ने धूमधड़ाके और फिजूलखर्ची से हटकर बेहद सादगी से एक दूसरे का होने का फैसला किया। दान-दहेज को भी शादी से परे रखा गया। बुधवार को बेल्हा देवी मंदिर में दोनों शिक्षकों ने परिजनों और चुनिंदा मित्रों के बीच एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।
हिंदू रीति-रिवाज से दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। मित्रों और स्नेहीजनों ने वर-वधु को आशीर्वाद दिया। विवाह के बाद वहां मौजूद लोगों को मंदिर परिसर में ही भोजन कराया गया। शादी में गिने-चुने बराती शामिल हुए। यह शादी बुधवार को शहर में चर्चा का विषय बनी रही।