मानदेय न मिलने से खफा जिला अस्पताल के स्वीपर सीएमओ के अश्वासन के बाद भी काम पर नहीं लौटे। शनिवार को पांचवें दिन भी वह धरने पर बैठे रहे। इसके चलते शनिवार को भी ओपीडी से लेकर वार्ड तक गंदगी का अंबार लगा था। सीएमओ के आदेश के बाद सीएमएस ने नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को बुलवाया। उन्होंने अस्पताल परिसर को साफ किया। इससे मरीजों को काफी राहत मिली।
जिला अस्पताल में साफ-सफाई की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी गई है। एजेंसी के ठेकेदार अपने कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं दे रहे हैं। चार माह से मानदेय न मिलने और बढ़ोतरी न होने से खफा स्वीपर अस्पताल में साफ-सफाई करने से इनकार करते हुए हड़ताल पर चले गए हैं। पांचवें शनिवार दोपहर तक अस्पताल में साफ-सफाई नहीं की गई। दुर्गंध से मरीज परेशान हो रहे थे। सीएमओ के आदेश के बाद सीएमएस ने नियमित कर्मचारियों को लगवाकर वार्ड को जहां साफ कराया वहीं नगर पालिका अध्यक्ष से बात कर नगर पालिका के स्वीपरों को बुलवाकर अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कराई। तब कहीं जाकर मरीजों ने राहत की सांस ली। नगर पालिका के कर्मचारियों ने कूड़े को अस्पताल परिसर में ही डंप कर दिया। इससे वार्ड में भर्ती मरीजों को दुर्गंध से परेशान होना पड़ रहा है।
अस्पताल का कचरा उठाने के लिए शासन लाखों रुपये खर्च करता है। इलाहाबाद की एक नामित एजेंसी को बायोमेडिकल वेस्ट उठाने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। मगर स्वीपरों के हड़ताल पर चले जाने के कारण बायोमेडिकल वेस्ट भी नहीं उठाया जा रहा है। जबकि शासन ने बायोमेडिकल वेस्ट को कहीं पर डंप करने पर रोक लगा रखी है।
एजेंसी के जिम्मेदार लोग यदि अस्पताल मेें साफ-सफाई नहीं करवाते हैं तो अब उन्हें काम नहीं दिया जाएगा। उनका नाम ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। किसी दूसरी एजेंसी को साफ-सफाई की जिम्मेदारी दी जाएगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।