मध्य प्रदेश की रहने वाली महिला को प्रेमजाल में फंसाकर यौन शोषण करने के आरोपी निलंबित सीओ नवनीत नायक के खिलाफ आखिरकार मंगलवार को पट्टी कोतवाली में रेप का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पीड़िता का बयान लेने के बाद पुलिस ने उसे मेडिकल के लिए भेजा। जनपद के पट्टी सर्किल में बतौर सीओ तैनात रहे नवनीत नायक की करतूत से खाकी एक बार फिर कलंकित हुई है।
सीओ नवनीत नायक की प्रतापगढ़ में जुलाई 2019 में प्रतापगढ़ में तैनाती हुई थी। उन्हें पट्टी सर्किल का सीओ बनाया गया था। इससे करीब एक साल पहले मध्य प्रदेश की एक महिला से फेसबुक के जरिए उनकी दोस्ती हुई। महिला एक संस्था में काम करती है। उसका आरोप है कि प्रतापगढ़ में तैनाती के दौरान वह अक्सर सीओ से मिलने पट्टी आती-जाती रही। वह शहर के एक होटल में रुकती थी।
सीओ नवनीत नायक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शादी की बात कहने पर गालीगलौज करते हुए ब्लैकमेलिंग के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर भगा दिया। उसकी शिकायत के बाद भी न तो पट्टी पुलिस ने कार्रवाई की और ही पुलिस अफसरों ने। जिसके बाद उसने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद जांच शुरू हुई।
जांच में मामला सही मिलने पर शाहजहांपुर में तैनात सीओ नवनीत नायक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब उनके खिलाफ पट्टी कोतवाली में दुष्कर्म समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ है। पीड़ित महिला का पुलिस ने मेडिकल कराया और बयान दर्ज किया। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि पीड़िता का न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाएगा।
पुलिस लाइन के गेस्ट हाउस में भी महिला के साथ बनाए संबंध
निलंबित सीओ नवनीत नायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला का पुलिस लाइन स्थित गेस्ट हाउस में भी आना-जाना था। उसकी तहरीर में जबरन शारीरिक संबंध बनाने का घटनास्थल ट्रांजिस्ट हास्टल पुलिस लाइन बताया गया है। जहां तबादले पर आने वाले सीओ समेत दूसरे अफसर रुकते हैं।
न्यायालय में बयान के बाद कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़ित महिला का कोर्ट में बयान कराने के बाद पुलिस निलंबित सीओ नवनीत नायक को गिरफ्तार करने की कवायद शुरू करेगी। मामला पुलिस अफसर से जुड़ा होने के कारण विवेचक फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। पीड़िता का बयान कोर्ट में होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई में तेजी लाएगी। चर्चा है कि दुष्कर्म के मामले में फंसे निलंबित सीओ को शासन बर्खास्त भी कर सकता है।