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तौलिया, साबुन, फिनायल की कागज पर सप्लाई

Wed, 30 Jan 2019 12:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
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 तौलिया, साबुन, फिनायल के साथ ही बालिकाओं के लिए ब्रश और मंजन की सप्लाई कागज पर हो रही है। कस्तूरबा स्कूलों के आसपास गंदगी और नालियां बजबजा रही हैं। आलम यह है कि पूरे सीजन में बिस्तर की सफाई ही नहीं होती है।  इसके चलते जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की दशा चिंताजनक बनी हुई है। मगर, अफसर हैं कि उन्हें हकीकत देखने का मौका ही नहीं मिलता है।
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जिले में संचालित पंद्रह कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों की दशा बेहद चिंताजनक बनी हुई है। तीन साल से एक ही ठेकेदार को सप्लाई का टेंडर दिया जा रहा है। आलम यह है कि तौलिया, साबुन, फिनायल, ब्रश, मंजन की सप्लाई कागज पर की जा रही है। इससे बालिकाओं को सफाई करने का न तो अवसर मिलता है और न ही सामग्री मुहैया कराई जाती है। यह सिर्फ लालगंज के सरायजानमती स्थित कस्तूरबा स्कूल की नहीं है, बल्कि अधिकांश कस्तूरबा में ऐसा ही हो रहा है।  

कस्तूरबा स्कूलों की हाल यह है कि जहां बालिकाएं रहती हैं, उसके आसपास गंदा पानी भरा हुआ है और नालियां बजबजा रही हैं। सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं होने से कोई भी व्यक्ति नालियों को साफ करने की जिम्मेदारी नहीं निभाता है। बालिकाओं का बिस्तर तो पूरे सीजन में नहीं साफ किया जाता है। कस्तूरबा स्कूलों में पढने वाली बालिकाओं की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, मगर विभागीय अधिकारियों को हकीकत देखने का मौका नहीं रहता है।   
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ऊपर से नीचे तक चल रहा है कमीशन का खेल  
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में राशन से रजाई तक की आपूर्ति में कमीशन का खेल चल रहा है। वार्डेन से लेकर विभागीय अधिकारी तक कमीशन लेकर सारी अव्यवस्थाओं पर पर्दा डाल रहे हैं। ठेकेदार पर मेहरबान यह अधिकारियों को खाना-नाश्ते की जांच करने का मौका ही नहीं मिलता है।  

तीन साल से एक ही ठेकेदार को दिया जा रहा है टेंडर  
अधिकारियों को कमीशन देकर खुश करने वाले ठेकेदार पर अफसर मेहरबान हैं। लगातार तीन साल से एक ही ठेकेदार को टेंडर दिया जा रहा है। इससे वह मनमानी करने से नहीं चूकता है।  

डॉक्टर के बयान के बाद भी रूटीन चेकअप बता रहे अधिकारी  
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद गुप्ता के बयान के बाद भी जिला समन्वयक बालिका शिक्षा शंकर सुमन बालिकाओं का रुटीन चेकअप बताते रहे। आश्चर्य की बात तो यह रही कि इतना सब होने के बाद भी जिला समन्वयक और बीएसए कस्तूरबा गांधी स्कूल की हकीकत देखने नहीं गए।  

लखनऊ में हूं, वार्डेन को नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच के लिए जिला समन्वयक से कराकर दोषियों को दंडित किया जाएगा।  
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।


कस्तूरबा की छात्राओं को बनाया बंधक, कमरे से निकलने पर पांबदी
 सांगीपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राएं वार्डन के तुगलकी फरमान से बंधक बनकर रहने को मजबूर हैं। स्कूल की नाकामी बाहर न आने पाए इसके लिए छात्राओं को कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया जाता। बजबजाती नालियां व चारों ओर गंदगी की दुर्गंध के बीच छात्राओं को रखा गया है। छात्राओं की सुरक्षा का हवाला देकर विद्यालय परिसर के भीतर की नाकामी को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग की नाक बचाने के लिए शिक्षा विभाग के आला अफसर तानाशाहीपूर्ण फैसले को भी सही बताते हुए दिखाई दे रहे हैं।  

सांगीपुर विकास खंड के देऊम पश्चिम में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थित है। इस आवासीय विद्यालय को शासन ने छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा देकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए स्थापित किया है। यहां बदहाल शिक्षा व्यवस्था और खाने पीने की किल्लत के चलते छात्राओं की संख्या न के बराबर रह गई है। सिर्फ कागज पर ही छात्राओं का पंजीकरण है, जबकि आवासीय स्कूल में अधिकतर छात्राएं नदारद हैं। सांगीपुर के कस्तूरबा विद्यालय की बदहाली की हकीकत खंगालने के लिए अमर उजाला की टीम स्कूल पहंची तो यहां की स्थिति देख पैर के नीचे से जमीन ही खिसक गई।

स्कूल के चारों ओर बजबजाती नालियां व फैली गंदगी के उठती दुर्गंध में छात्राओं को रखा गया है। विद्यालय प्रशासन को न तो छात्राओं के स्वास्थ्य की न चिंता है और न ही उनकी परेशानी की। जिस परिवेश में छात्राएं रहने को मजबूर हैं, उसमें तो लोग अपने घर के जानवरों को भी नहीं रखते हैं। इसी परिस्थितियों में लोग अपने कलेजे के टुकड़े को पठन पाठन के लिए भेजने का मजबूर हैं। इस स्कूल में तो छात्राओं के साथ तालिबानों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। विद्यालय की नाकामी छिपी रहे इसके लिए उन्हे कमरों से बाहर नही निकलने दिया जाता है।

उनकी सुविधाओं पर डाका डालने वाली वार्डन ऐश्वर्य राज लक्ष्मी सुरक्षा के नाम पर छात्राओं को परिसर तक में नहीं आने देती। जबकि विद्यालय में चौकीदार की भी नियुक्त की गई है। लेकिन वार्डन के तुगलकी फरमान से यहां तो छात्राओं को लगभग बंधक की तरह बनकर रहना पड़ता है। जाहिर है कि छात्राएं बाहर आएंगी तो स्कूल की नाकामी भी आम लोगों तक पहुंचेगी। इस स्कूल में मीडिया तक के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई जिससे कि आवासीय विद्यालय की बदहाली आम लोगों तक न पहुंचे। इतना ही नही छात्राओं से बाहर से भी पूछताछ नहीं करने दिया जाता है।

इसके पीछे बस यही प्रयास है कि कहीं विद्यालय की तार तार हो चुकी व्यवस्था की कलई न खुल जाए। यहां पढने वाली छात्राओं की तबियत खराब होने पर उन्हे उपचार नहीं दिया जाता, बल्कि अभिभावकों को बुलाकर रात के अंधेरे में घर भेजा जाता है। कस्तूरबा विद्यालय की बदहाली सामने आने से बेसिक शिक्षा विभाग की नाक न कट जाए, इसके लिए अफसर भी छात्राओं की सुरक्षा की विवशता बता रहे हैं। साफ है कि अफसर व वार्डन मिलीभगत से छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की नाक का सवाह है, इसलिए वार्डन व अफसर नाकामी को छिपाने के लिए हर संभव प्रयत्न कर रहे हैं।

शाम होते ही स्कूल छोड़ देती हैं वार्डन  
घुइसरनाथधाम। दिन में छात्राओं की सुरक्षा की आड़ विद्यालय की नाकामी छिपाने वाली वार्डन ऐश्वर्य राज लक्ष्मी शाम होते ही स्कूल छोड़ देती है। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि शाम को पांच बजे तक वार्डन चली जाती हैं और अगले दिन नौ बजे तक वह वापस लौट आती हैं। बताया जाता है कि शहर में उनका कही आवास है और सांगीपुर इलाके में रिश्तेदारी है। साफ है कि नाकामी छिपाने के लिए जितनी चिंता वार्डन को दिन में रहती है, शाम होते होते उन्हीे छात्राओं को भगवान भरोसे छोड़ वह नदारद हो जाती हैं।  
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