00 विश्व होम्योपैथ दिवस पर विशेष 00
खुद बीमार होम्योपैथिक अस्पताल, इलाज के लिए डॉक्टर का इंतजार
38 डॉक्टर, 25 फार्मासिस्ट के भरोसे 47 अस्पताल का हो रहा संचालन
संवाद न्यूज एजेेंसी
प्रतापगढ़। मरीजों का इलाज करने वाले होम्योपैथिक अस्पताल मौजूदा समय में खुद ही बीमार हैं। इलाज के लिए अस्पतालों को डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का इंतजार है। 47 अस्पतालों में आने वाले मरीजों का इलाज करने के लिए महज 38 डॉक्टर और 25 फार्मासिस्ट की तैनाती विभाग की ओर से की गई है।
जिला अस्पताल को मिलाकर 38 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। जिला अस्पताल में दो, और बाकी होम्योपैथिक अस्पतालों में एक डॉक्टर-एक फार्मासिस्ट की पद रिक्त हैं। इस समय जिले में होम्योपैथिक के महज 38 डॉक्टर हैं, जबकि अस्पतालों की संख्या 47 है। जिला अस्पताल में दो के बजाए एक डॉक्टर जहां मरीजों का इलाज कर रहे हैं, वहीं दस ऐसे अस्पताल हैं जहां डॉक्टर और फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं होने से ताला लटक रहा है। होम्योपैथिक दवा पर भरोसा रखकर नरसिंहपुर, सरायगनई, राजापुर समेत दस अस्पताल में आने वाले मरीज को निराश होकर लौटना पड़ता है।
इनसेट
48 के सापेक्ष महज 25 फार्मासिस्ट की तैनाती
होम्योपैथ विभाग में 48 के सापेक्ष महज 25 फार्मासिस्ट की ही तैनाती हुई है। ऐसे में इन फार्मासिस्टों से सप्ताह भर में अलग-अलग चार-चार अस्पतालों में ड्यूटी ली जा रही है। रविवार को जिस फार्मासिस्ट को आरोग्य मेले में बैठाया जाता है। बुधवार के दिन इन फार्मासिस्ट को अवकाश दे दिया जाता है। ऐसे में जहां डॉक्टर भी है उन्हें मरीजों का इलाज करने के साथ ही दवा खुद से वितरण करना पड़ रहा है। इससे दिनों दिन होम्योपैथ अस्पताल की दशा बिगड़ती ही जा रही है।
वर्जन-
डॉक्टर के साथ फार्मासिस्ट के रिक्त पदों को भरे जाने के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। दो बार जिले में आए आयुष मंत्री के सामने इस समस्या को रखा गया था। जुलाई से अगस्त के बीच में चिकित्सकों के खाली पद भरने का आश्वासन दिया गया है।
डॉ. आशुतोष मिश्र, जिला होम्योपैथ अधिकारी।