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नमामि गंगे योजना की भेट चढ़ा शीतला सप्तमी का मेला

Mon, 02 Jul 2018 12:24 AM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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शीतला सप्तमी के पर्व पर इस बार मानिकपुर शहाबाद घाट पर स्नान करने वाले स्नानार्थियों को निराश होना पड़ेगा। नमामि गंगे योजना के तहत बन रहे घाट के चलते स्नान वाले इलाके में खुदाई की जा चुकी है। यहां स्नानार्थियों के स्नान करने की जगह ही नहीं है। अभी कुछ दिन पहले पूर्णिमा को भी स्नानार्थियों को निराश होना पड़ा था। पहली बार शीतला सप्तमी का ऐतिहासिक मेला शहाबाद घाट पर प्रभावित हो रहा है।
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मानिकपुर के शहाबाद घाट पर नमामि गंगे योजना के तहत घाट बनाने के लिए करीब एक वर्ष से काम चल रहा है। इधर कुछ दिनों से ठेकेदार ने इस घाट को पूरी तरह से खोद दिया है। गंगा तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं छोड़ा है। इसके चलते आम स्नानार्थी भी स्नान नहीं कर पा रहे थे। अभी कुछ दिन पहले पूर्णिमा स्नान के लिए आए स्नानार्थियों को निराश होकर लौटना पड़ा था। हालांकि काफी कुछ स्नानार्थी कालाकांकर घाट चले गए थे। दो जुलाई से शहाबाद और ज्वालादेवी धाम में शीतला सप्तमी का पांच दिवसीय ऐतिहासिक मेला लगता है। यहंा कई जनपदों से स्नानार्थी आते हैं और यहीं पर देवी को शांत करने के लिए घाट पर दह बैठाते हैं। इसके अलावा पांच दिन लगातार मेला चलता है। मेला इतना बड़ा लगता है कि पंाच दिन प्रशासन को सारी व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। इस बार स्नान के लिए घाट ही न होने पर मेले के आयोजन पर संकट मंडरा रहा है। ठेकेदार ने अपनी अदूरदर्शिता के चलते घाट को पूरी तरह से खोदवाकर छोड़ दिया है। अब गंगा जल लेने या फिर स्नान करने के लिए शहाबाद घाट पर कहंीं जगह ही नहीं बची है। अगर  ठेकेदार एक तरफ से काम करते हुए आगे बढ़ता तो लोगों के सामने यह समस्या न खड़ी होती, लेकिन उसने पूरे घाट को एक साथ खोदवा दिया है। इसके चलते लोगों को शहाबाद घाट पर स्नान करने का मौका नहीं मिलेगा। होता यह था कि शहाबाद गंगा घाट पर स्नान करने के बाद लोग ज्वालादेवी धाम में दर्शन के लिए जाते थे। इस बार जब वह कहीं दूसरे घाटों पर स्नान करेंगे तो ज्वाला देवी धाम में दर्शन के लिए आने में उन्हें दिक्कत होगी। प्रशासन और ज्वालादेवी धाम के ट्रस्ट के लोगों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं इस बार न तो कोई बैठक हुई और न ही मेला कराने के लिए कोई प्रयास किया गया। इसके चलते मेले का आयोजन किस तरह से हो पाएगा कहना मुश्किल है।

छह महीने से तीर्थ-पुरोहितों का हो रहा नुकसान
कुंडा। शहाबाद घाट पर खुदाई होने के कारण स्नानार्थी नहीं आ रहे हैं। यही नहीं घाट खोद दिए जाने के कारण तीर्थ पुरोहितों के तख्त नहीं लग पा रहे हैं। इसके चलते न तो वह स्नानार्थी के संपर्क में आ पा रहे हैं और न ही उनका पूजापाठ करा पा रहे हैं। खुदाई के चलते घाट पर आने वाले स्नानार्थी लौट जाते हैं। तीर्थी पुरोहित प्रेमनाथ दीक्षित का कहना है कि घाट तो बन रहा है यह खुशी की बात है, लेकिन स्नानपर्वों के लिए थोड़ी जगह छोड़ी जानी चाहिए थी। रामभरोस दीक्षित का कहना है कि ठेकेदार ने एक बार में ही पूरी खुदाई करा दी। एकतरफ से खुदाई कराकर घाट बनवाया जाता तो शीतला सप्तमी जैसे ऐतिहासिक मेले पर संकट न आता।
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राजघाट के किनारे साफ-सफाई कराई गई है। लोग चाहें तो कालाकांकर में भी स्नान कर सकते हैं। अभी एक साल तो घाट बनने के दौरान दिक्कत ही है। लेखपालों की ड्यूटी लगा दी गई है।
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विजयपाल सिंह, एसडीएम कुंडा।
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