प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की रात पीक्यूआरएस मालगाड़ी का इंजन बेपटरी हो गया थ। इस मामले में प्रथम दृष्टया जांच रिपोर्ट मिलने पर एडीआरएम ने शंटिंग मैन को सस्पेंड कर दिया। ड्यूटी पर मौजूद रहे दूसरे रेलकर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इस कार्रवाई से रेल महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
शुक्रवार की रात करीब पांच नंबर लाइन पर पीक्यूआरएस मालगाड़ी खड़ी थी। उसे यार्ड के नौ नंबर लाइन पर लेना था। स्टेशन मास्टर कमर अली ने प्वाइंट देने के बाद लीवरमैन वंशराज से सिग्नल देने को कहा। इसके बाद वाकी टॉकी के जरिए शंटिंगमैन लालजी व अशर्फी लाल को जानकारी दी गई। शंटिंगमैन पीक्यूआरएस मालगाड़ी को मेन लाइन पर लेकर जेलरोड क्रासिंग के पास पहुंचे। आगे बढ़ने के बाद जब लाइन मिली तो वे ट्रेन को बैक करते हुए यार्ड की ओर ले जाने लगे। इसी बीच शंटिंगमैन, सिग्नल डिपार्टमेंट के साथ ही ऑपरेटर विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते मालगाड़ी की पूरी बोगी और इंजन का दो पहिया निकलने के बादे प्वाइंट को बदल दिया गया। जिससे इंजन के बीच का पहिया बेपटरी हो गया। इससे मेन लाइन बाधित हो गई। सूचना मिलने पर एडीआरएम समेत रेल विभाग के अधिकारी प्रतापगढ़ पहुंचे। प्रथम दृष्टया जांच के बाद एडीआरएम ने शंटिंग मैन अशर्फी लाल को सस्पेंड कर दिया। वहीं इस मामले की जांच बैठा दी गई। सूत्रों की मानें तो इंजन बेपटरी होने के लिए कई लोगों ने लापरवाही बरती है। रिपोर्ट को रेल मुख्यालय लखनऊ भेज दिया गया है। जंक्शन पर शंटिंगमैन अशर्फीलाल के बाद अभी कई कर्मचारियों पर गाज गिरेगी। इस मामले में प्रभारी स्टेशन अधीक्षक इबरार अहमद ने बताया कि अभी इस मामले की जांच चल रही है।
जंक्शन पर शुक्रवार की रात मालगाड़ी का इंजन ट्रैक से उतर गया था। हादसे के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी ट्रेनों का संचालन ढर्रे पर नहीं लौटा। अफसर भी घटना से सबक लेकर कमियों को दूर कराने के बजाय लापरवाह बने हुए हैं। अभी भी जर्जर रेल पटरियों पर ट्रेनों को दौड़ाया जा रहा है। ऐसे में फिर से हादसा का खतरा बना हुआ है।
शंटिंग के दौरान शुक्रवार की रात स्टेशन के करीब पीक्यूआरएस मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया था। रेल विभाग के मुताबिक हादसा प्वाइंट के पास गैप होने के कारण हुआ था। इससे आठ घंटे तक रूट बाधित रहा। हालांकि विभाग अभी इस हादसे की जांच में जुटा है। मगर स्टेशन के पास बने डायमंड प्वाइंट की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ट्रेन के आने की सूचना मिलने के बाद आनन- फानन में रेलवे कर्मचारी लोहे की राड से ठोंककर प्वाइंट को सही करता है। इसके बाद ट्रेन को पास कराया जाता है। ट्रेन पास होने के दौरान भी यह खतरा बना रहता है कि कहीं ट्रेन पटरी से उतर न जाए। यदि ट्रेन पटरी से उतर जाएंगी तो यात्रियों की जान भी जा सकती है। मगर इस ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। विभाग के कर्मचारियों की मानें तो प्वाइंट में गैप अधिक है। इस ओर इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों का ध्यान नहीं पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्वाइंट आटोमैटिक होना चाहिए। ट्रेन के आने की सूचना के बाद स्टेशन मास्टर लाइन क्लीयर करता है। उसी समय प्वाइंट ठीक हो जाना चाहिए। मगर ऐसा हो नहीं रहा है। किसी भी दिन फिर ट्रेन हादसे की घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
प्वाइंट ठीक न होने के कारण यदि किसी दिन ट्रेन हादसा हो जाएगा तो फिर अफसर और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मगर रेल महकमा इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
ट्रेन चालकों की लापरवाही के चलते किसी दिन ट्रेन हादसा हो सकता है। दरअसल रेल इंजन से सटा हुआ गार्ड का कोच होता है। गार्ड के कोच में इमरजेंसी ब्रेक होता है। ज्यादातर ट्रेन चालक मोटी कमाई करने के चक्कर में इंजन के बगल वाले कोच में यात्रियों को बैठा लेते हैं। उनसे यात्रा के बदले किराया भी लेते हैं। रविवार को हावड़ा से चलकर अमृतसर जाने वाली पंजाब मेल के इंजन से सटे गार्ड का कोच यात्रियों से भरा था। इमरजेंसी ब्रेक में यात्रियों ने अपना झोला व बैग फंसा रखे थे। विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि गार्ड कोच में लगा इमरजेंसी ब्रेक यदि यात्री लगा दिए तो ट्रेन पलट सकती है। मगर इस ओर चालक ध्यान नहीं देता है। यही हाल जनता एक्सप्रेस में भी देखने को मिला।