जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में एक भी बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं, मगर शिक्षकों के रजिस्टर पर बच्चों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाय तो एक अप्रैल से तीन मई के बीच में 17,956 बच्चों ने नाम लिखाया है। जबकि वास्तविकता तो यह है कि बच्चों के स्कूल नहीं आने के बावजूद फर्जी संख्या की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चों का नाम लिखाने के लिए 30 मार्च से तीन मई तक स्कूल चलो अभियान चलाया गया। गांव से शहर तक बच्चों ने रैली निकालकर अभिभावकों को जागरूक किया गया कि वह अपने बच्चों का नाम स्कूलों में लिखाएं।
जिले भर में चले इस अभियान का अभिभावकों पर कितना असर पड़ा, यह तो विभाग के लोगों के साथ ही अभिभावक बेहतर जानते हैं, मगर शिक्षकों ने विभाग को जो आंकड़ा भेजा है, इससे वह स्वयं संदेह के दायरे में आ रहे हैं। भीषण गर्मी से बेहाल स्कूलों में एक भी बच्चे नहीं आ रहे हैं, ऐसी दशा में नौनिहाल अपना नाम लिखाने कैसे स्कूल पहुंच गए। फिलहाल विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाय, तो जिले के 2020 प्राइमरी स्कूलों में 10,106 और 733 मिडिल स्कूलों में 7850 बच्चों ने दाखिला ले लिया है। यह आंकड़े कितने सही है, यह तो नहीं कहा जा सकता, मगर इतना तो तय है कि अगर इसी प्रकार शिक्षक फर्जी आंकड़े देते रहे, तो किसी दिन विभागीय अधिकारियों की पोल खुल सकती है। बीएसए माधवजी तिवारी ने बताया कि स्कूलों के हेडमास्टरों से जो सूचना मिल रही है, उसे एकत्रित किया गया है। जल्द ही टीम भेजकर वास्तविकता की जांच कराई जाएगी।