बुधवार को बेल्हा ने नया इतिहास रचा। संडवाचंद्रिका विकास खंड के कमालुद्दीनपुर और मंगरौरा ब्लाक के पूरेभीखा गांव में स्वच्छता के क्षेत्र में नया अध्याय जुड़ा। जनपद में जो अब तक नहीं हो सका था वह जिलाधिकारी के प्रयास से 25 दिन के भीतर ही संभव हो गया। यह दोनों गांव पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो गए। गांव के जो लोग अभी तक शौचालय बनाने के लिए रुपये की मांग करते थे वही अब खुद का शौचालय बनवाकर प्रयोग कर रहे हैं।
ओपेन डेफिकेशन फ्री (ओडीएफ) यानि खुले में शौच से मुक्त गांव बनाने के लिए एक माह पूर्व प्रारंभ की गई मुहिम ने अपना रंग दिखाया है। जिले के संडवा चंद्रिका विकास खंड के कमालुद्दीनपुर और मंगरौरा के पूरेभीखा गांव को बुधवार को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया। यूनीसेफ की पांच सदस्यीय टीम ने अफीम कोठी में 4 से 8 मार्च तक जो प्रशिक्षण दिया, उससे प्रेरित होकर डीएम की अगुवाई में अफसरों और जागरूक लोगों ने जिले के 201 गांवों में अलख जगाने का बीड़ा उठाया। अभियान की कमान खुद जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने संभाली। इसमें लोगों ने बढ़कर-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे अभियान को नई ऊंचाइयां मिलने लगीं।
डीएम ने सबसे पहले कमालुद्दीनपुर गांव का दौरा किया था। अफसरों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की टीम ने भोर में ही डीएम की अगुवाई में गांव में डेरा डालना शुरू कर दिया। बाहर शौच के लिए जा रहे लोगों को ये लोग माला पहनाने के साथ खुले में शौच से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक कर रहे थे। लगातार चले अभियान का नतीजा रहा कि धीरे-धीरे गांव के लोगों की सोच बदल गई। उन्होंने घर में शौचालय बनवाने का फैसला किया। गांव की महिलाओं ने भी इस दिशा में पहल की। इसी का नतीजा रहा कि ये दोनों गांव पूरी तरह से शौच मुक्त हो गए। स्वच्छता की दिशा में गांव के युवाओं, निगरानी समिति के सदस्यों में शामिल शिक्षक, ग्राम पंचायत अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भी अहम भूमिका रही।