बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों का नामांकन कराने के लिए चलने वाला स्कूल चलो अभियान इस वर्ष चुनावी शोर में गुम हो गया। एक अप्रैल से 20 मई तक चलने वाले इस अभियान में अध्यापक गांव-गांव जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं। अफसरों और शिक्षकों के चुनाव की व्यस्तता को देखते हुए इस वर्ष यह अभियान ही नहीं चला। इससे बच्चो का नामांकन शून्य है। इधर, दो दिन बाद स्कूलों में गर्मी की छुट्टी होने जा रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में बच्चों की निरंतर घटती संख्या से परेशान आला अधिकारियों ने एक अप्रैल से प्रारंभ होने वाले शिक्षा सत्र से स्कूल स्तर पर स्कूल चलो अभियान प्रारंभ करना था। इसमें अध्यापकों को गांव-गांव जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करना था। इससे अधिकाधिक बच्चों का नाम स्कूल में लिखवाना था।
एक अप्रैल से 20 मई तक चलने वाला यह अभियान इस वर्ष चुनावी शोर के चलते बेअसर रहा। अधिकारी और शिक्षक चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहे। इस कारण न तो कोई रैली हुई और न ही कोई प्रयास किया गया। इधर, 20 मई को गर्मी की छुट्टी हो रही है।
अब एक जुलाई को स्कूल खुलने के बाद इस अभियान पर जोर दिया जा सकता है। मगर इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी। दरअसल में जुलाई माह में जब अध्यापक बच्चों को खोजने घर-घर जाएंगे, तो इससे पढ़ाई बाधित होगी और स्कूल के बच्चे भी दूसरे स्कूलों का रास्ता पकड़ लेंगे।
नर्सरी स्कूल के टीचर घर में ही कर रहे हैं दाखिला
नर्सरी स्कूल के टीचर बच्चों के घर पहुंचकर फीस की रियायत का झांसा देकर वहीं पर दाखिला ले रहे हैं। आलम यह है कि 20 मार्च से घर-घर दस्तक देने वाले नर्सरी स्कूल के टीचर बच्चों के घर तक वाहन मुहैया करा रहे हैं। ऐसे में अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में सुरक्षित महसूस करके दाखिला करा रहा है।
स्कूलों में अधिकाधिक बच्चों का नामांकन कराने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है, मगर चुनाव की व्यस्तता के चलते वह स्वरूप नहीं मिल पाया, जो उसे मिलना चाहिए था। एक जुलाई से स्कूल खुलते ही अभियान चलाकर अधिकाधिक बच्चों को नामांकित किया जाएगा।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए