सिंचाई और जलसंसाधन विभाग ने कागजों पर ही 22 तालाबों की खुदाई कर डाली है। जबकि हकीकत में अभी तक एक भी तालाब धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। इतना ही नहीं जिन तालाबों को विभाग अपना बता रहा है वास्तविकता में वह मनरेगा के तहत पहले ही खोदे जा चुके हैं। बरसात के पानी को संरक्षित करने के लिए जिले में तालाबों की खुदाई और उन्हें बचाने के लिए मुहिम प्रारंभ की गई है। इसके लिए जिले के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को सांगीपुर और लालगंज विकास खंड में 39 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया था । आईडब्लूडीपी योजना के तहत खुदने वाले इन तालाबों की लागत अधिकतम 7.50 लाख और कम से कम तीन लाख रुपये रखी गई है।
अभी तक विभागीय अधिकारी तालाबों की खुदाई के लिए बजट नहीं मिलने की बात कह रहे थे। मगर, 24 मई को सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में इस बात का खुलासा कर सभी को चौंका दिया कि उसने 22 तालाबों को खुदवाकर पान्री भी भरवा दिया है। उनके द्वारा वर्ष 2014-15 में 06 और वर्ष 2015-16 में 16 तालाबों की खुदाई करने का दावा किया गया है। गुरुवार को कार्यालय में मौजूद भूमि संरक्षण अधिकारी से जब तालाबों की सूची मांगी गई तो वह हक्के-बक्के रह गए। थोड़ी देर सोचने के बाद पहाड़पुर गांव के एक तालाब का नाम बताया। जब गांव के लोगों से इसकी जानकारी ली गई तो पता चला कि उस तालाब की खुदाई मनरेगा के तहत पूर्व में हो चुकी है। फिलहाल मामले की जांच हुई तो सारी कहानी अपने आप सामने आ जाएगी।