माननीयों की विधायक निधि से प्यास बुझाने के फंड को कार्यदायी संस्था तार-तार करने पर तुली हुई है। हैंडपंप लगाने के नाम पर कार्यदायी संस्था जिला पंचायत उद्योग नेे 1.63 करोड़ रुपये हजम कर गई है। दो वर्ष बाद भी विभाग को हिसाब देने में पसीना आ रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी के अधीन निर्माण इकाई जिला पंचायत उद्योग है। वास्तव में इस संस्था के पास न तो अवर अभियंता हैं और न ही पर्याप्त कर्मचारी। इसके बावजूद करोड़ों रुपये का काम कराने का ठेका ले लेती है। वर्ष 2014-15 और 2015-16 में जिला पंचायत उद्योग को विधायक निधि से 1.63 करोड़ रुपये दिए गए।
विधायकों की संस्तुति पर मिली यह धनराशि 545 हैंडपंपों को लगाने के लिए दी गई थी। प्रशासनिक व्यवस्था के मुताबिक माननीय कार्यदायी संस्था को हैंडपंप लगाने के लिए सूची प्रदान करेगा, और हैंडपंप लगाने के बाद रुपये का उपभोग करने की सूचना परियोजना निदेशक कार्यालय को देगा। जिला पंचायत उद्योग को यह धनराशि कई किस्तों में मिली है, मगर अभी तक उपभोग का प्रमाणपत्र नहीं दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि पंचायत उद्योग के कर्मचारी जानबूझकर सूची नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके पीछे यह भी राज हो सकता है कि जल्दी सूची भेजने से अगर जांच हो गई तो मामला बिगड़ सकता है। फिलहाल हैंडपंप लगाने के लिए मिले 1.63 करोड़ रुपये में जिला पंचायत उद्योग के जिम्मेदार खेल करने में लगे हुए हैं।