भारतीय स्टेट बैंक लीलापुर शाखा में पांच करोड़ के घपले के मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित होने से बैंक के शीर्ष अफसरों की गर्दन फंस सकती है। इधर, छह माह से फरार चल रहे आरोपी शाखा प्रबंधक जयनाथ सरोज को हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
जिले के लीलापुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में तैनात तत्कालीन शाखा प्रबंधक जयनाथ सरोज, सहायक शाखा प्रबंधक दीपक वर्मा ने मिलकर 4,98,30,000 रुपये का गबन किया था। 20 मार्च 2024 को शाखा प्रबंधक शिखर अग्रवाल ने लीलापुर थाने में घपले का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले का खुलासा होने के बाद बैंक में एफडी करने वाले ग्राहक जब शाखा में अपने अभिलेखों की जांच कराने लगे, तो पता चला कि घपले की रकम तकरीबन पांच करोड़ रुपये है। बैंक अफसरों और पुलिस का सहयोग नहीं मिलने पर खाताधारकों ने पूरे मामले की जांच कराने के लिए सीबीआई से मांग करते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ में वाद प्रस्तुत किया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और ओम प्रकाश शुक्ल ने पीड़ित ग्राहक मिथलेश तिवारी, विजय पाठक सहित अन्य खाताधारकों की मांग को वाजिब करार देते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने को कहा है। खाताधारकों की माने तो बैंक में लगभग दस करोड़ रुपये का घपला हुआ है, मगर पुलिस और बैंक के अफसर इसे पांच करोड़ ही मान रहे हैं। फिलहाल सीबीआई की जांच में एसबीआई के शीर्ष अफसरों की गर्दन फंसना लगभग तय है। दरअसल, आरोपी शाखा प्रबंधक ने अपने नौ माह के कार्यकाल में गबन की घटना को अंजाम दिया और आरएम सहित अनेक बैंक के अफसर आंख बंदकर देखते रहे।
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प्रसव के बाद पत्नी की होगी गिरफ्तारी
गबन के मामले में आरोपी शाखा प्रबंधक जयनाथ सरोज की पत्नी भावना और पिता धर्माजी सरोज को आरोपी बनाया गया है। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ था कि आरोपी शाखा प्रबंधक ने ग्राहकों के खाते से अपने पिता और पत्नी के खाते में रुपये अंतरित किए थे। धर्माजी सरोज को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि पत्नी भावना को प्रसव के बाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तार करने को कहा है। हालांकि उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ ने आरोपी शाखा प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर करते हुए अविलंब गिरफ्तारी का आदेश दिया है।
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चहेते ठेकेदार को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
ग्राहकों के खाते से चहेते ठेकेदार के खाते में रुपये अंतरित करके मोटी कमाई करने वाला ठेकेदार भी अब पुलिस की गिरफ्त में आ जाएगा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ ने अग्रिम जमानत की मांग को ठुकरा दिया है। हालांकि लीलापुर पुलिस ने ठेेकेदार को क्लीन चिट दे दी है, मगर बैंक अफसरों की मानें तो ठेकेदार के खाते में करोड़ों रुपये अंतरित किए गए हैं।
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खाताधारकों के चेहरे पर दिखी खुशी, उमड़ी भीड़
बृहस्पतिवार को एसबीआई लीलापुर में एक बार फिर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। छह माह की लंबी लड़ाई के बाद सीबीआई को जांच मिलने से वह काफी खुश दिखे। ग्राहकों का कहना है कि अब सही ढंग से जांच होगी और ग्राहकों के रुपये मिल जाएंगे। पीड़ित विजय पाठक, मिथलेश तिवारी ने बताया कि सीबीआई की जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, जांच अधिकारियों की मांग पर अभिलेख मुहैया कराए जाएंगे।
राकेश पांडेय, आरएम, एसबीआई