सांगीपुर एसबीआई के शाखा प्रबंधक की संवेदनहीनता ने मानवता को शर्मशार कर दिया। बेटी की मौत के बाद शव के अंतिम संस्कार के लिए पैसा निकालने आए वृद्ध की पासबुक फेंक डांटकर चैंबर से भगा दिया गया। कहा गया कि वह अधिक पैसा निकालने के लिए बेटी की मौत की बात बना रहा है। शाखा प्रबंधक की संवेदनहीनता देख ग्राहकों ने कैशियर से पैसा दिलाया तब जाकर उसकी बेटी के शव का अंतिम संस्कार हो सका।
संागीपुर थाना क्षेत्र के बसुआपुर के रामदुलारे कोरी की बेटी गीता (30) की शादी लखराव गांव में हुई है। कुछ महीनों से गीता की तबियत खराब थी तो वह पिता के घर आकर इलाज कराने लगी। लेकिन बुधवार को अचानक गीता की तबियत और अधिक खराब होने से उसकी संासे थम गई। घर में रखे गए नकद पैसे परिजनों ने इलाज में खर्च कर दिए थे। हालात कुछ ऐसे बने की शव के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं बचे। इसके चलते गुरुवार की शाम परिजनों को अंतिम संस्कार की तैयारी करने की बात कहकर मृतका का वृद्ध पिता सांगीपुर एसबीआई में पैसा निकालने चला गया।
वह दस हजार रुपये का विड्रॉल भर कर कतार में लग गया। कैशियर के पास पहुंचा तो उसे बताया कि कैश कम होने के चलते शाखा प्रंबधक वीके अग्रवाल ने दो हजार से अधिक देने पर रोक लगा रखी है। इस पर वृद्ध उनके चैंबर में पहुंच गया और आप बीती बताते हुए दस हजार निकालने की फरियाद लगाने लगा। लेकिन एसबीआई के शाखा प्रबंधक वीके अग्रवाल ने वृद्ध से पासबुक लेकर जमीन पर फेंक दी और यह कहते हुए चैंबर से बाहर कर दिया कि पैसा के लिए वह झूठ बोल रहा है। बिना पैसे के बेटी के शव का अंतिम संस्कार कैसे होगा इसी फिक्र में वह बैंक में ही दहाड़ें मार कर रोने लगा।
उसको रोता विलखता देख ग्राहक भावुक हो गए और उसे कैशियर के पास ले जाकर बताया कि उनके हिस्से का पैसा काटकर वृद्ध को दे दिया जाए। जिसके बाद कैशियर ने उसे दस हजार रुपये का भुगतान किया तक जाकर वह घर के लिए रवाना हो सका। घर पहुंचने के बाद उसने बेटी के शव का अंतिम संस्कार किया। वृद्ध के साथ मानवता को शर्मसार करने की सारी हदें पार करे वाले शाखा प्रबंधक वीके अग्रवाल का बयान और भी बेशर्मी भरा है। उनका कहना है कि बीस जनवरी को उसे भेज दीजिए भुगतान कर दिया जाएगा। एसबीआई सांगीपुर के शाखा प्रबंधक का शर्मनाक कारनामा दिन भर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।