फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरयू एक्सप्रेस से दैनिक यात्रियों ने मुंह मोड़ा

Mon, 27 Apr 2015 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
फैजाबाद से इलाहाबाद जाने वाली सरयू एक्सप्रेस से दैनिक यात्रियों ने मुंह मोड़ लिया है। समय की पटरी से उतर चुकी ट्रेन से यात्रियों को परेशानी हो रही है। यात्री अब बसों से सफर करने लगे हैं। लेटलतीफी के लिए अभी तक लखनऊ से प्रयागघाट जाने वाली पीआरएल ट्रेन ही बदनाम थी। एक समय ऐसा था कि ट्रेन इलाहाबाद के यात्रियोें की पसंदीदा थी। सुबह पौने दस बजे आने वाली ट्रेन समय की पटरी से ऐसी उतरी कि दोबारा समय पर नहीं आ सकी। अब वही हालत फैजाबाद-इलाहाबाद के बीच चल रही सरयू एक्सप्रेस की भी हो गई है। पहले यह ट्रेन सुबह सवा सात बजे प्रतापगढ़ आ जाती थी। सर्विस करने वाले सैकड़ों यात्री इससे इलाहाबाद, सुल्तानपुर और फैजाबाद रोज आते-जाते हैं। डेली यात्रियों के लिए यह सबसे अच्छी ट्रेन मानी जाती है।
विज्ञापन



वापसी में भी यह समय से आती है। मगर कुछ महीनों से लेटलतीफी बढ़ गई है। आए दिन यह करीब तीन से सात घंटे लेट रहती है। रविवार को पांच और सोमवार को आठ घंटे देरी से प्रतापगढ़ पहुंची। इसके चक्कर में यात्री देर से कार्यालय पहुंचते हैं और अधिकारियों से डांट खानी पड़ती है। शुरू में तो यात्रियों की समझ में नहीं आया। जब इसमें सुधार नहीं हुआ तो यात्रियों ने इससे यात्रा करना कम कर दिया। अधिकांश डेली पैसेंजर बस से गंतव्य चले जाते हैं। वापसी में अगर राइट टाइम रही तो इलाहबाद और प्रयाग में ट्रेन पकड़ लेते हैं। वरना बस से लौट आते हैं।

यात्रियों का मानना है कि जब से सरयू एक्सप्रेस फैजाबाद से आगे मनकापुर जाने लगी तभी से इसकी लेटलतीफी चालू हेा गई। उसके पहले तक कभी कभार लेट होती थी। मगर जब से मनकापुर तक बढ़ा दिया, लेट हो जा रही है। इस बात को रेलवे कर्मचारी भी मानते हैं। खास बात यह है कि इलाहाबाद जाने वाले यात्रियों के लिए सरयू और पीआरएल दो ही गाड़ियां हैं। मगर दोनाें ही लेटलतीफी के चलते अपनी पहचान खोती जाती रही हैं। लोगों का आरोप है कि रेलवे अधिकारी यात्रियों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरयू एक्सप्रेस सोमवार को तकरीबन आठ घंटे लेट थी। इसकी जानकारी यात्रियों को दिए बगैर कर्मियों ने टिकट बांट दिया। बाद में यात्री टिकट लौटाने गये तो उनका टिकट वापस नहीं हुआ। यात्रियों का आरोप है कि अगर पहले पता चल जाता तो टिकट न लेते। इससे उनका नुकसान हुआ। स्टेशन अधीक्षक केएन शर्मा का कहना है कि बाबुओं को चाहिए कि वे ट्रेन की पोजीशन लेेने के बाद ही टिकट बांटें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें