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संस्कृत स्कूलों के अब बहुरेंगे दिन

Mon, 06 Aug 2018 11:23 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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sanskrit
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अब जीर्ण-शीर्ण कमरे में संस्कृत स्कूल नहीं चलेंगे, बल्कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेजों की भांति ही शिक्षण कक्ष और पठन-पाठन का तरीका बदलने की पहल तेज कर दी गई है। जिले के 34 संस्कृत स्कूलों में अब गणित और विज्ञान  की भी पढ़ाई होगी। अभी तक इन स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई तो होती थी, मगर विज्ञान और गणित की पढ़ाई नहीं होती थी। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए जल्द ही आयोग से तैनाती की जाएगी।
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उप्र संस्कृत बोर्ड से संचालित संस्कृत स्कूलों की दशा दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। संस्कृत स्कूलों की प्रति लोग का नजरिया भी बदलता जा रहा था। मगर शासन की पहल से अब इन स्कूलों की उपयोगिता बच्चों और शिक्षकों को नजर आएगी। अब इन स्कूलों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की तरह पढ़ाई होगी। स्कूल खुलने और बंद होने का समय निर्धारित करने के साथ ही छात्र-छात्राओं को नियमित क्लास लेना पड़ेगा। अभी तक इन स्कूलों में संस्कृत मूल विषय के साथ  ही हिंदी और अंग्रेजी की शिक्षा दी जाती थी। मगर शासन की नई पहल से अब छात्र-छात्राओं को हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही विज्ञान और गणित की शिक्षा दी जाएगी। इन स्कूलों में विज्ञान,गणित के अध्यापकों की तैनाती नहीं की गई है, इसलिए माध्यमिक सेवा चयन आयोग से प्रशिक्षित अध्यापकों की तैनाती करने का फैसला लिया गया है। शिक्षकों की तैनाती होते ही शिक्षण प्रक्रिया गतिविधि तेज कर दी जाएगी।

इंटरकालेजों की भांति होंगे खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम
संस्कृत स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं होगी, बल्कि इंटरकालेजों की भांति खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे बच्चों को जहां आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, वहीं प्रतिभा निखर कर सामने आएगी।
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संस्कृत स्कूलों में अब सभी विषय के बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। बच्चे अपनी इच्छा के अनुसार विषय का चयन कर सकेंगे। शिक्षकों की तैनाती के लिए आयोग का प्रयास जारी है। अब संस्कृत स्कूल इंटरकालेजों से किसी मामले में पीछे नहीं रहेंगे।
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एसपी यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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