प्रतापगढ़। सई नदी पर बने दोनों पुल लगातार खतरे की ओर बढ़ते जा रहे हैं। शिकायत के बाद भी अधिकारियों के कान में जूं नहीं रेंग रही। ऐसे में किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। पुल की दरार को छिपाने के लिए जिम्मेदार डामर से लीपापोती कर देते हैं। गायघाट और कादीपुर घाट पर बने पुल को लेकर प्रशासन की अनदेखी किसी भी दिन लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
गायघाट में सई नदी पर करीब पंद्रह वर्ष पूर्व पुल बनकर तैयार हुआ। इसके बाद आवागमन प्रारंभ हो गया। रात-दिन पुल पर बड़े और छोटे वाहनों का आवागमन बना रहता है। शहर से जाते समय पुल का पहला पिलर नीचे की ओर धंस रहा है। हादसे की आशंका को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने डामर की लीपापोती करा दी। ताकि लोग हादसे से बच सकें। यही हाल जामताली जाने वाले मार्ग पर कादीपुर में सई नदी पर बने पुल का है।
यह पुल करीब 12 वर्ष पहले आवागमन के लिए खोला गया। बनने के करीब चार वर्ष बाद ही बीच में पुल का पिलर धंसने लगा। इससे एक तरफ पुल नीचे बैठ रहा है। इस ओर लोगों ने विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर डामर का लेपन कराकर अधिकारी चुप बैठ गए। धीरे-धीरे पुल का पिलर धंसने से लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह पिलर धंसता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों के लिए पुल का पिलर खतरा बन जाएगा। समय रहते पुल के पिलर को धंसने से रोकने का इंतजाम जिम्मेदार अधिकारियों को करना चाहिए।
गायघाट रोड पर सई नदी में बने पुल की हालत सबसे बदतर है। हर दिन अधिकारियों का इस मार्ग से आवागमन भी होता है, लेकिन कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। कई वर्षों से लीपापोती करने वाले विभाग का डामर बारिश में बह गया। पुल पर वाहनों के लगातार फर्राटा भरने और लगातार पुल के पिलर के धंसने से लोगों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। पिलर के नीचे धंसने के कारण पुल की सरिया दिखाई पड़ने लगी है। अब तो पुल की दिख रही सरिया भी लोगों के लिए खतरे का सबब बन चुकी है।
गायघाट और कादीपुर सई नदी पर बने पुल के पिलर धंसने के बाद दरार की जानकारी नहीं है। पुल की जांच कराएंगे। यदि पिलर धंस रहा है तो हादसे की आशंका है। चिंता की बात है। जनता की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
डीपी दुबे, एक्सईएन, लोनिवि, प्रांतीय खंड