सदर विधानसभा के उपचुनाव में पिछड़ी जाति के मतदाताओं को साधने के लिए बसपा, सपा के बाद अब भाजपा-अद एस गठबंधन ने भी पिछड़ी जाति का ही कार्ड खेला है। रविवार देर रात तक भाजपा और अद नेताओं के बीच प्रत्याशी चयन को लेकर माथापच्ची होती रही।
बाद में अंतत: भाजपा के जिला मंत्री रहे राजकुमार पाल के नाम पर मुहर लगी। एकमात्र कांग्रेस ने सवर्ण प्रत्याशी पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा की भौगोलिक स्थिति बदल गई थी। इसके पहले मानधाता विकासखंड व शहर सदर विधानसभा में शामिल हुआ करता था। नए परिसीमन के बाद सदर विधानसभा में मंगरौरा विकासखंड के साथ ही संडवाचंद्रिका क्षेत्र के कई गांव शामिल हो गए। नई विधानसभा में पिछड़ी जाति के मतदाताओं की बाहुल्यता है।
2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह यादव मुन्ना बसपा व भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त देकर विधायक निर्वाचित हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने नागेंद्र सिंह यादव मुन्ना को प्रत्याशी बनाया था। जबकि भाजपा व अपना दल एस ने संगमलाल गुप्ता पर भरोसा जताया था। पिछड़ी जाति के प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता ने सपा प्रत्याशी को हरा दिया।
संगमलाल के सांसद चुने जाने के बाद सदर विधानसभा उपचुनाव में बसपा ने पिछड़ी जाति के मतदाताओं के भरोसे मैदान मारने के लिए रणजीत सिंह पटेल, सपा ने बृजेश पटेल और भाजपा-अदएस गठबंधन ने भी पिछड़ी जाति के बूते मैदान मारने के लिए राजकुमार पाल को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
जबकि कांग्रेस ने युवा नेता नीरज त्रिपाठी को सदर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है। फिलहाल तीनों प्रमुख दलों द्वारा पिछड़ी जाति का प्रत्याशी उतारने को लेकर मतदाता भी हैरत में हैं।