राजस्व न्यायालय के अधिकांश पीठासीन अधिकारी विधि स्नातक नहीं हैं। इसलिए ज्यादातर निर्णय विधि सम्मत व विधि प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होते। यह स्थिति विधि के समक्ष समता यानी भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है।
यह बातें रविवार को पृथक राजस्व न्यायिक संवर्ग गठन समिति के संरक्षक हरिश्चंद्र शुक्ल व अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में कही। दोनों वकीलों ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में खारिज दाखिल, हदबरारी, नक्शा व कागजात दुरुस्ती करण , बंटवारा आदि के मुकदमे वर्षों तक चलते हैं। इसकी वजह ये है कि इन न्यायालयों में ज्यादातर पीठासीन अधिकारी प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण कोर्ट में समय नहीं दे पाते।
राजस्व अदालतों के पीठासीन अधिकारी कम से कम विधि स्नातक हों और प्रशासनिक कार्यों के दायित्व का बोझ उन पर नहीं होना चाहिए। सोमवार को इन मांगों से संबंधित ज्ञापन डीएम और जिला जज को सौंपा जाएगा।