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आलू का रेट तय नहीं, मनमाने दाम पर हो रही खरीद

Sun, 07 Jan 2018 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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अमर उजाला ब्यूरो - फोटो : pratapgarah
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जिले में इस बार आलू बिक्री को कोई सरकारी रेट ही तय नहीं है। इसके चलते व्यापारी और आढ़तिए अपने हिसाब से रेट तय कर रहे हैं। किसानों से कम दाम पर आलू लेकर फुटकर और थोक बाजार में महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। मुनाफे के इस खेल में आम लोगों के साथ किसान भी पिस रहे हैं। दरअसल बाजार में आलू अभी भी 10 से 12 रुपये किलो बिक रहा है। इससे आम आदमी परेशान है, लेकिन किसानों से आलू की खरीद के लिए शासन द्वारा पिछले साल तय किया गया रेट दिखाया 
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जा रहा है।
जिले में 3.5 हजार हेक्टेअर भूभाग पर किसान आलू की खेती करते हैं। तकरीबन 7 लाख मीट्रिक टन पैदावार होती है। लालगंज, सदर और रानीगंज तहसील में आलू की खेती के लिए उपजाऊ जमीन मानी जाती है। यहां के लोग अब गेहूं की फसल से अलग हटकर सब्जी की खेती करने लगे हैं। जिसके कारण बाहर से आलू की आवक पूरी तरह बंद हो गई है। हालांकि पड़ोस के सोरांव से आलू भले आ जाती है लेकिन इसक कोई अधिक असर नहीं पड़ता। आलू किसानी करने वाले सरकार की ओर से आलू के रेट निर्धारित करने का बाट जोह रहे हैं ताकि उनका भी फायदा हो सके। मंडी में आलू थोक भाव में 7 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जबकि फुटकर व्यापारियों को साढ़े सात व आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिया जा रहा है। बाजार में आलू के फुटकर दाम 10 रुपये प्रति किलो है। लेकिन असली खेल बिचौलियों और आढ़तियों का है। दरअसल पिछली साल शासन ने 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू खरीदने का निर्णय लिया था। बिचौलिए किसानों से इस बार भी इसी रेट पर आलू की खरीद कर रहे हैं। अभी इस बार आलू का रेट शासन की ओर से नहीं तय किया जा सका है। यही कारण है कि किसानों की गाढ़ी कमाई पर पानी फिरता नजर आ रहा है। तमाम कवायदों के बाद भी उन्हें मुनाफा होता नजर नहीं आ रहा है।
लागत से ज्यादा है कोल्ड स्टोरज का किराया
किसानों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उन्हें आलू की पैदावार में जितनी लागत लगानी पड़ती है, उससे ज्यादा उन्हें आलू रखने के लिए कोल्डस्टोरेज का किराया देना पड़ रहा है। उद्यान विभाग और किसान से बातचीत के मुताबिक एक हेक्टेअर खेत में तकरीबन 200 क्विंटल आलू की पैदावार होती है और इसमें किसानों को 25000 रुपये तक लागत आती है। जबकि कोल्डस्टोरज में 50 से 60 किलो की एक बोरी को रखने का किराया 135 रुपये के आसपास है। प्रतिकिलोग्राम के हिसाब से देखें तो किसानों को एक किलो आलू कोल्डस्टोरेज में रखने के लिए तकरीबन 2.50 रुपये देने होते हैं। लंबे समय तक रखे जाने के कारण इसमें काफी आलू खराब हो जाता है। कोल्डस्टोरेज तक आलू ले जाने और ले आने का किराया भी किसानों को ही वहन करता पड़ता है। उसके बाद फिर बिचौलिए और आढ़तिए अपनी मर्जी से रेट तय कर देते हैं। ऐसे में किसानों की कमर टूट जाती है।
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दूसरे जिलों के लोग भी कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं आलू
जिले में आलू व दूसरी सब्जियां रखने के लिए 10 कोल्ड स्टोरेज काम कर रहे हैं। कुछ की क्षमता अधिक है तो कुछ की कम। यहां आलू की एक बोरी (50 से 60 किग्रा.) रखने के लिए किसानों को 135 रुपये चुकाने होते हैं। यानि साल भर कोल्ड स्टोर में आलू रखने की कीमत ढाई रुपये प्रति किलो पहले ही चुकानी होती है। कुछ में एक लाख बोरियां रखने की क्षमता है तो कुछ 80 हजार बोरियों वाले कोल्डस्टोरेज हैं। आलू किसानों के साथ ही व्यापारी भी आलू को सीजन पर कोल्डस्टोरेज में जमा कर देते हैं। दाम में उछाल आते ही व्यापारी कोल्ड स्टोरेज से आलू बेचने के लिए निकालने लगते हैं।
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