शुक्रवार को हवन और पूजन के साथ नवरात्र का समापन हुआ। घंटा-घड़ियालों के बीच नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन देवी के सिद्धिदात्री स्वरूप की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर उनसे कामना पूरी करने का आशीर्वाद मांगा गया। मां बेल्हा देवी मंदिर में भक्तों का रेला उमड़ा रहा। देवी के दर्शन करने के पश्चात श्रद्धालुओं ने मंदिर के पीछे प्रांगण में बने विशाल हवन कुंड मे विश्व कल्याण के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालीं। इसी के साथ देवी की विदाई हुई। देवी के दर्शन को लोग लाइन में घंटों लग कर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कलश की स्थापना करने श्रद्धालुओं ने घरों में भी हवन किया। कन्याओं को भोजन करा कर उनकी विदाई की गई। जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया गया। भक्तों ने रोट चढ़ाकर देवी को प्रसन्न किया।
नव दुर्गा में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शंकर ने इनकी कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वह लोक में अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। नवरात्र के अंतिम दिन शुक्रवार को सिद्धिदात्री देवी के स्वरूप की भक्तों ने पूजा-अर्चना कर मां से कामना पूरी करने का आशीर्वाद मांगा। नवरात्र का अंतिम और शुक्रवार का दिन होेने से मां बेल्हा देवी में मेला लगा रहा। हवन करने वाले श्रद्धालु तड़के ही मंदिर परिसर में जमा हो गए। प्रांगण में हवन के लिए बनाए गए विशाल कुंड के पास बैठकर भक्तों ने वेद मंत्रोच्चारण के बीच हवन किया। जिले के अन्य देवी मंदिरों मां चंडिका देवी धाम, वाराही देवी, ज्वाला देवी धाम में भी दर्शन को सैकड़ों भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया। नवरात्र के समापन पर भक्तों ने गरीबों को भोजन कराकर पुण्य अर्जित किया।