बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर 35 शिक्षकों के नौकरी पाने के मामले का खुलासा होने के बाद अब फिर से सभी शिक्षकों के अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। शासन से गठित टीम विभाग से अभिलेखों को लेकर बोर्ड और विवि से गोपनीय सत्यापन कर रही है ।
बेसिक शिक्षा विभाग फर्जीवाड़े को लेकर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बीते वर्षों में 35 शिक्षकों के फर्जी मिलने के बाद शासन ने सभी अध्यापकों के अंकपत्र और प्रमाणपत्र की असलियत जांचने का फैसला किया है। शासन से गठित टीम विभाग में तैनात सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं का डाटा लेकर बोर्ड और विवि से सत्यापन की कार्रवाई में जुट गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग में जिले में 6,213 अध्यापक-अध्यापिकाएं तैनात हैं। उधर, विभागीय लोगों का कहना है कि सभी के अभिलेखों का सत्यापन हो चुका है, मगर कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते यह सत्यापन महज कागजी कोरम पूंरा करने तक सीमित रह गया है। दरअसल, सत्यापन भेजते ही कर्मचारी शिक्षकों को पत्रांक संख्या और तिथि की जानकारी दे देते हैं।
इससे फर्जी अभिलेख बनवाकर नौकरी करने वाले शिक्षक सेटिंग करके सत्यापन भेजवा देते हैं। जिन 35 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले हैं, उनमें भी ऐसा ही खेल हुआ था। हालांकि विभाग ने जब दोबारा गोपनीय जांच कराई तो अभिलेख फर्जी निकल गए।
खंड शिक्षा अधिकारियों ने नहीं दर्ज कराया मुकदमा
बीएसए ने 17 अध्यापकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा था। मगर अभी तक एक भी मुकदमे के लिए तहरीर नहीं दी गई है। जबकि 18 अध्यापकों के खिलाफ मुकदमा पहले ही दर्ज हो चुका है।
शिक्षकों के अभिलेखों की गोपनीय जांच कराई जा रही है। शासन की पहल पर यह कार्य हो रहा है। इसमें विभाग का कोई रोल नहीं हैं। अगर किसी का अभिलेख फर्जी मिलता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अशोक कुमार सिंह, बीएसए