एक शहर, तीन मंडियां, सब्जी-फलों के अलग-अलग रेट
शहर में दो किमी के दायरे में सब्जियों एवं फलों के दामों में काफी अंतर
दुकानदार लगाते हैं मनमाना दाम, लग रही ग्राहकों को चपत, मुनाफाखोरों पर नकेल नही
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शहर में सब्जी और फल दुकानदार अपनी मर्जी से रेट निर्धारण कर रहे हैं। तीन किमी के दायरे में तीन प्रमुख मंडियों में सब्जियों और फलों के दाम अलग-अलग हैं। दरअसल, सब्जियों और फलों के दाम दुकानदार इलाके के हिसाब से तय कर देते हैं। वीआईपी इलाके में फलों की कीमत बीस से 25 रुपये बढ़ा दी जा रही है। यही हाल सब्जियों का है। कीमतों का निर्धारण अपने हिसाब से किया जा रहा है।
शहर से सटे चिलबिला स्थित महुली मंडी में सब्जी व फलों की थोक बिक्री होती है। यहां जिले के किसान सब्जी व फलों को थोक भाव में बेचते हैं। इसके अलावा मंडी में गैर जनपद व राज्यों से भी फलों एवं सब्जियां आती हैं। यहां फुटकर दुकानदारों की हर रोज भीड़ उमड़ती है। दुकानदार थोक भाव में सब्जी व फल यहां से ले जाते हैं और थोक भाव के तीन से चार गुना अधिक दाम में बढ़ाकर बेचते हैं। शहर में सब्जी मंडी पल्टन बाजार व सिविल लाइन में सब्जी व फलों की फुटकर बिक्री होती है। दोनों के बीच महज एक से डेढ़ किमी का दायरा है। महुली मंडी से आईं सब्जियों व फलों के दामों में दोनों जगह काफी अंतर है। महुली मंडी में कोहड़ा 5 रुपये प्रति किग्रा है, जबकि पल्टन बाजार में यही 20 रुपये व सिविल लाइन में 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसी तरह लौकी पल्टन बाजार में 30 तो सिविल लाइन मंडी 40 रुपये किग्रा है। करैला पल्टन बाजार में 30 तो सिविल लाइन में 40 रुपये किलो है। इसी तरह सेव, केला, आम सहित अन्य फल भी अलग-अलग रेट में बेचे जा रहे हैं।
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ग्राहक देखकर घटाते-बढ़ाते हैं दाम
शहर में पल्टन बाजार व सिविल लाइन सब्जी मंडी में सब्जी के दामों में काफी अंतर है। दरअसल फुटकर दुकानदार सब्जियों का दाम ग्राहकों को देखकर बढ़ाते हैं। कार सवार ग्राहक के अलग दाम हैं, बाइक व साइकिल से आने वाले के लिए अलग। पैदल आने वालों के लिए अगल दाम है। तोल- मोल न होने पर उन्हें अधिक कमाई हो जाती है। अधिक तोल- मोल करने वाले ग्राहक के लिए दाम घट भी जाते हैं।
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कभी नहीं होती जांच, ठगे जा रहे ग्राहक
मनमाने रेट पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों के खिलाफ कभी जांच नहीं होती है। इसके चलते ग्राहक ठगे जा रहे हैं। दुकानदार मनमाना दाम लगा रहे हैं। मंडी समिति का कहना है कि मंडी में निर्धारित दामों के अनुरूप ही सब्जी व फलों की बिक्री की जाती है। बाहर फुटकर दुकानदार कितने में व कैसे बेचते हैं, इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।