राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना में आवेदन करने वाले लोगों ने विभाग को चौंका दिया है। विभाग का मानना है कि जिले में सवा सात लाख परिवार हैं। मगर, आवेदन करने वालों संख्या साढे़ आठ लाख पहुंच गई है। कहानी अभी यहीं नहीं खत्म होती है। खुली बैठक में जिस प्रकार पात्रों की संख्या बढ़ रही है उससे लगता है कि आवेदकों की संख्या दस लाख के पार हो सकती है। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को दो रुपये किग्रा गेहूं और तीन रुपये प्रति किग्रा चावल मुहैया कराने के लिए इन दिनों राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राशनकार्ड बनाया जा रहा है। पात्रों के चयन के लिए जिला पूर्ति विभाग ने पहला जो मानक बनाया वह यह था कि जो परिवार पहले से अन्त्योदय और बीपीएल परिवारों में शामिल थे उन्हें लाभान्वित करने के साथ ही गांव के कोटेदार और तत्कालीन प्रधानों की मदद से नए लोगों को योजना में शामिल करेंगे। अब पात्रों की संख्या बढ़ाकर 4,65,125 कर दी गई है।
जिला पूर्ति विभाग की वेबसाइट पर आम लोगों को ऑनलाइन राशनकार्ड फीडिंग का मौका दिया गया है। अभी तक ऑनलाइन फीडिंग में लगभग चार लाख लोगों ने आवेदन कर गरीबी रेखा के नीचे का राशनकार्ड मांगा है। खेल करते हुए लोगों ने माता, भाभी, पत्नी और बहन के नाम फीडिंग कराई है। यहीं नहीं राशनकार्ड में यूनिट बढ़ाने के लिए सभी कार्डों में परिवार के सदस्यों का नाम डाला है। राशनकार्ड में शामिल लोग एक ही परिवार के नहीं है, यह दिखाने के लिए सिर्फ मुखिया का ही आधारकार्ड नंबर डाला गया है। जिस राशनकार्ड में सभी सदस्यों का आधारकार्ड नंबर डाला गया था उससे यह खुलासा हो गया है कि एक ही परिवार के कई सदस्यों ने राशनकार्ड के लिए आवदेन किया है।
हालांकि यह राशनकार्ड अब विभाग के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। एक तरफ जहां खुली बैठक कर अपात्रों को हटाने और पात्रों को जोड़ने की मुहिम चलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन आवेदक विभाग के लिए मुसीबत बने हुए हैं।