होलिका दहन के साथ ही बेल्हा होली के हुलास में डूब गया। होलिका दहन के बाद रंग-गुलाल उडने लगे। लोग एक-दूसरे को रंगों में भिगोते रहे। गुझिया और पापड़ का दौर भी खूब चला। दावतें भी दी गईं। देर रात तक बाजारों में चहल-पहल देखने को मिली।
बुधवार को प्रदोष काल का शुभारंभ होते ही अग्निदेव के जयकारे के बीच होलिका दहन का दौर शुरू हो गया। जिले में 2675 स्थलों पर होलिकाएं तैयार की गई थीं। शहर में 117 स्थानों पर होलिका बनाई गई थी। बुधवार की सुबह 9.19 बजे के बाद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत हो गई। जबकि सुबह 8.17 बजे से भद्रा की शुरुआत हुई जो रात्रि 8.12 बजे तक समाप्त हो गई। इसके बाद होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएगा।
तुला लगन, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, स्थिर योग के बीच अनुदया मुहूर्त में होलिका दहन लोग करने लगे। रात्रि 10.50 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहा। गुरुवार को दिनभर होली खेली जाएगी। दिनभर रंग, अबीर-गुलाल उड़ेगा। दिनभर होलिका दहन की तैयारी में जुटे होलियारों ने रात 9.12 बजे होलिका दहन का क्रम शुरू कर दिया।
पुरोहितों ने वैदिका मंत्रों के बीच अग्निदेव की पूजा अर्चना कर होलिका दहन की शुरुआत की। शहर के अंबेडकर चौराहा, भंगवाचुंगी, श्रीराम तिराहा समेत अन्य स्थानों पर होलिका दहन होता रहा। जयकारे के साथ लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते रहे।