चोरी छिपे रेल संपत्तियों का धंधा करने वाले कबाड़ी अब रेल क्वार्टरों तक घुस आए हैं। यहां आने के बाद इन लोगाें ने बकायदा कबाड़ खरीदने व बेचने का धंधा शुरू कर दिया है। तमाम शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार कबाड़ियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। यह सब हो रहा है रेलवे एक्सईएन आवास के पीछे बनी कॉलोनी में। यहां के अधिकांश क्वार्टरों में कबाड़ी रह रहे हैं। इन पर इनका बकायदा कब्जा है।
इनको रेल क्वार्टर में रहने की अनुमति कैसे मिली, यह भी रहस्य बना हुआ है। रेल का कोई भी जिम्मेदार इस बारे में मुंह नहीं खोल रहा है। रेलकर्मियों के अनुसार बाहर से आए कबाड़ियों ने अपना धंधा शुरू कर दिया है। काफी मात्रा में कबाड़ रखा गया है। किसी को कोई शक न हो, इसलिए दिन भर इन क्वार्टरों में ताला बंद रहता है। रात होते ही कबाड़ की मंडी गुलजार हो जाती है। मैजिक, टेंपो से कबाड़ लादकर बाहर भेजा जाता है। रेल संपत्तियां भी कबाड़ी पार करने से नहीं चूक रहे हैं। रेल पटरी, सिग्नल के उपकरण, केबिल, पानी की टोटी इत्यादि कबाड़ियों के स्टोर रूम में आसानी से मिल सकती है। रेल संपत्तियों की सुरक्षा का जिम्मा आरपीएफ और इंजीनियरिंग विभाग का है।
मगर दोनों में से किसी को भी रेल संपत्तियों को चूना लगाने वाले कबाड़ी नजर नहीं आ रहे हैं। रेलकर्मियों का आरोप है कि सभी की मिलीभगत है। शायद यही वजह है कि यह धंधा एक्सईएन आवास के पीछे चल रहा है ताकि किसी को शक न हो। बता दें कि एक्सईएन आवास के सामने ही इंजीनियरिंग विभाग का बहुत बड़ा स्टोर है। यहां लोहे के भारी भरकम सामान रखे गए हैं। अगर लापरवाही का यही आलम रहा तो रेल संपत्तियां अधिक दिनों तक कबाड़ियों की नजर से दूर नहीं रह पाएंगी।