पूतना भगवान कृष्ण को मारना नहीं चाहती थी। बल्कि उनके चरणों में स्थान चाहती थी। भगवान के लिए वो साध्वी थी और लोगों के लिए दुष्टा थी। शनिवार को रामपुर खागल में स्वामी रामभद्राचार्य ने पूतना प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।
तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने राधे-राधे, गोविंद राधे...भजन से कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने करपात्री महाराज से मिलन, पूतना वध, अश्वत्थामा-दुर्योधन संवाद प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि युद्ध जीतने के बाद पांडव-कृष्ण के साथ चले गए। अश्वत्थामा ने शिविर में पांच लोगों को सोते देखा तो सोचा यही पांडव हैं और उनका वध कर दिया। ये पांचों द्रौपदी के पुत्र थे।
दोपहर तीन बजे से छह बजे तक भक्तों ने कथा का रसपान किया। रामपुर खागल में कथा स्थल पर हरदोई विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक चित्रकूट आनंद शुक्ल, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन इलाहाबाद अध्यक्ष रामाकांत ओझा, चेयरमैन राजापुर संजीव मिश्रा, अजय शर्मा, विवेक उपाध्याय, मनोज तिवारी मौजूद रहे।
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जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे भजन पर झूमे भक्त
रामपुर खागल में दूसरे दिन की कथा समापन के बाद सांस्कृतिक संध्या में गायक कन्हैया मित्तल ने जो राम का लाए हैं, हम उनको लाएंगे भजन प्रस्तुत किया तो श्रोता झूम उठे। पहले दिन गायिका दिव्या दुबे ने भजन संध्या में प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया था।