कुंडा के बटौआ में आयोजित गायत्री महायज्ञ में आहुति देते श्रद्धालु। आयोजक
कुंडा। पूरी प्रकृति ही परमात्मा का स्वरूप है। वृक्ष भगवान के रोम है। नदियां भगवान की नसें हैं। पर्वत भगवान का भक्ति स्थल है। प्रकृति की रक्षा ही प्रभु की सेवा है। यज्ञ से पूरी प्रकृति की रक्षा होती है। यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है। जिसके जीवन में यज्ञ नहीं है, वह मानव जीव होते हुए भी पशु के समान है।
उक्त बातें विकास क्षेत्र कुंडा के बटौआ परसीपुर गांव में आयोजित 27 दिवसीय श्रीमद् भागवत, शिव महापुराण व गायत्री महायज्ञ के दौरान आचार्य देवव्रत महाराज ने कही। मुख्य यजमान आचार्य संतोष महाराज ने मां गायत्री की आरती की। इस मौके पर बार एसोसिएशन प्रयागराज के महामंत्री प्रभा शंकर मिश्र, योगेश राजपुरोहित, राज मिश्रा, शैलेंद्र पांडेय, श्रीकांत पांडेय, सत्यव्रत शुक्ला मौजूद रहे।