रोडवेज स्टेशन को भले ही मॉडल डिपो का दर्ज मिले तीन साल हो गया हो, मगर हालत जस के तस बने हुए हैं। आज भी यात्री टूटे टीनशेड के नीचे बैठकर बसों की प्रतीक्षा करते हैं तो विभागीय अधिकारी अपनी जान को हथेली पर रखकर जर्जर भवन में कार्य कर रहे हैं। वहीं डिपो परिसर में बरसात का पानी भर रहा है। अमर उजाला में इससे संबंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद अफसरों की नींद टूटी। अब जलजमाव वाले स्थानों पर मिट्टी गिरवाई जा रही है।
तीन दिनों तक लगातार बरसात के चलते डिपो परिसर से लेकर वर्कशाप तक पानी भग गया था। इसके चलते एक ओर यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा था तो दूसरी ओर बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही थी। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में इस समस्या को प्रमुखता के साथ उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अफसरों की नींद टूटी और उन्होंने आननफानन में डिपो में जलभराव वाले स्थानों पर मिट्टी गिरवानी शुरू कर दी। इससे यात्रियों को काफी राहत मिली। बरसात के कारण जिन बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही थी, अब किसी तरह उन्हें तैयार कर रोड पर निकाला जा रहा है। एआरएम पीके भाष्कर ने बताया कि मॉडल डिपो निर्माण कार्यदायी संस्था को नोटिस भी दिया गया है। डिपो में जलभराव रोकने के लिए मिट्टी गिरवा दी गई है।