वाराणसी में 102 की 38, 108 की है 19 एंबुलेंस
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जिला महिला अस्पताल की सीएमएस ने एक नया फरमान जारी कर दिया है। अस्पताल परिसर में 108 एंबुलेंस के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इससे एंबुलेंस से अस्पताल आने वाली प्रसव पीड़िता के साथ डिस्चार्ज होने के बाद घर जाने वाली प्रसूताओं को जहां परेशान होना पड़ रहा है वहीं सीएमएस के इस फरमान से एंबुलेंस चालक व ईएमटी खफा हैं।
जिला महिला अस्पताल का परिसर छोटा है। एंबुलेंस परिसर में खड़ी हो जाती हैं तो ओपीडी में आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामाना करना पड़ता है। वहीं बाहरी लोगों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अफसर और कर्मचारी अपने वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए महिला अस्पताल परिसर में खड़ा कर बगल हो जाते हैं। इससे प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल लेकर आने वाले एंबुलेंस चालक को परेशान होना पड़ता है। वहीं महिला अस्पताल की सीएमएस रीता दूबे ने एक नया फरमान जारी कर दिया है। 108 व 102 एंबुलेंस एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर के पास एक पत्र को भेजकर समस्त एंबुलेंस को गेट के बाहर खड़ा करने को कहा है। गेट के बाहर किसी प्रकार की पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है। एंबुलेंस के मुड़ने भर की जगह नहीं बचती है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन महिलाओं को होती है जिनका प्रसव ऑपरेशन से होता है। उन्हें चलने में दिक्कत बनी रहती है। गेट के पास खड़े होकर एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। प्रोग्राम मैनेजर पुणेन्द्रू ने बताया कि शासन के निर्देश पर एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद घर से अस्पताल लेकर आती है तो दूसरी ओर प्रसव के बाद उनके घर तक मुफ्त में छोड़ने के लिए जाती है। मगर सीएमएस इस तरह की रोक लगाकर वे शासन के आदेश का उलंघन कर रही हैं। इसकी शिकायत सीएमओ से की गई है। डा. रीता दूबे, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल ने बताया कि परिसर के अंदर एंबुलेंस काफी देर तक खड़ी रखने पर रोक लगाई गई है। दरअसल परिसर छोटा है। एक साथ कई एंबुलेंस के खड़ी होने से आम लोगों को दिक्कतें होती हैं। जब किसी का फोन आए तो उन्हें इमरजेंसी तक जाने की छूट दी गई है।