सरकारी अस्पतालों में नेत्र चिकित्सक के पद सालों से रिक्त हैं। जिस कारण तीन निजी अस्पतालों के चिकित्सक सालों से मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन कर रहे हैं।
2023 से अब तक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने 3987 मरीजों का मुफ्त में ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के लिए मिलने वाले 70 लाख रुपये का भुगतान स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं किया गया। जिस कारण जिले में चिह्नित करीब चार हजार मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन करने से निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सीएमओ ने शासन को पत्र भेजकर बजट मांगा है।
राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2023 से अब तक इंदिरा गांधी आई हॉस्पिटल मुंशीगंज अमेठी, जन सेवा ट्रस्ट कृष्णा आई हॉस्पिटल और इंदिरा ग्रामीण स्वयं सेवा अस्पताल समिति ट्रस्ट मुगरा बादशाहपुर जौनपुर ने 3987 मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन में आने वाले खर्च के लिए सीएमओ कार्यालय में बिल भेजकर भुगतान कराए जाने की मांग की, लेकिन पैसे का भुगतान नहीं हो सका। वहीं, जनपद में संचालित 30 सीएचसी में नेत्र सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी है। जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
लेंस खरीदने के साथ ही मरीज को घर से लाना और ऑपरेशन के बाद उन्हें पहुंचाना पड़ता है। डेढ़ माह तक मुफ्त में दवा और चश्मा दिया जाता है। बजट मिलने के बाद ही मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन किया जाएगा।
सुनील कुमार सिंह, प्रबंधक, कृष्णा आई हॉस्पिटल
शासन को पत्र भेजकर बजट की मांग की गई है। जैसे ही बजट मिलता है, तत्काल अस्पतालों के खाते में धनराशि भेजी जाएगी।
डॉ. एएन प्रसाद, सीएमओ।
इनसेट:-
संस्था का नाम वित्तीय वर्ष मोतियाबिंद ऑपरेशन बकाया धनराशि
इंदिरा गांधी आई हॉस्पिटल 2023-24 1964 39.28 लाख रुपये
इंदिरा गांधी आई हॉस्पिटल 2024-25 1372 27.44 लाख रुपये
कृष्णा आई हॉस्पिटल प्रतापगढ़ 2024-25 553 11.06 लाख रुपये
इंद्रिरा ग्रामीण स्वयंसेवी अस्पताल 2024-25 98 1.96 लाख रुपये