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बगैर परीक्षा के ही नंबर बांटने की तैयारी

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माध्यमिक विद्यालयों में खेल शिक्षकों का अभाव वर्षों से बना है। पूरे सत्र न तो बच्चों को खेल शिक्षा से संबंधित किताबी ज्ञान मिला और न ही शारीरिक शिक्षा। प्रशिक्षण के नाम पर पूरे सत्र महज खानापूर्ति की गई। अब कालेजों में खेल व शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षा में भी फर्ज अदायगी की जा रही है। शिक्षकों की टीम चार्ट बनाकर नंबर बांटने का कोरम पूरा कर रही है। इधर कालेजों द्वारा बगैर परीक्षा के ही चार्ट में मनमाने नंबर चढ़ाए जा रहे हैं।
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जिले में 37 राजकीय, 78 सहायता प्राप्त व 545 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में विषय वस्तु के पाठ्यक्रम के साथ खेल व शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं संचालित करने का निर्देश है। खेल के तहत विद्यालय में प्रार्थना सभा, बच्चों को खेल गतिविधियों की जानकारी के साथ ही शारीरिक शिक्षा व खेल संबंधी किताबी ज्ञान भी देना होता है।
इसकी बाकायदा 100 अंक की परीक्षा होती है। 30 अंक का प्रायोगिक और 70 अंक की लिखित परीक्षा। लिखित परीक्षा में फेल होने पर परीक्षार्थी दोबारा यह परीक्षा दे सकता है, मगर प्रयोगात्मक परीक्षा में फेल होने पर ऐसा नहीं है।
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इस परीक्षा का आंतरिक मूल्यांकन होता है। मजे की बात यह है कि जिले में 80 फीसदी ऐसे विद्यालय हैं जहां खेल शिक्षक ही नहीं हैं। वर्षों से शिक्षकों के अभाव के चलते विद्यालयों में पूरे सत्र खेल व शारीरिक शिक्षा के नाम पर महज फर्ज अदायगी होती आ रही है। न तो मौखिक, न ही प्रैक्टिकल और न ही किताबी ज्ञान बच्चों को मिल सका है।
अब बोर्ड परीक्षा नजदीक आने पर प्रयोगात्मक परीक्षा नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। बच्चों से बुकलेट तक तैयार नहीं कराई गई है। कालेज के शिक्षकों द्वारा बगैर परीक्षा कराए ही मनमाने तरीके से नंबर बांटकर चार्ट तैयार कर आनलाइन अपडेशन करने की तैयारी है। डीआईओएस सर्वदानंद ने बताया कि प्राप्तांक अपलोड करने के लिए 10 फरवरी तक का समय दिया गया है। इसमें किसी भी तरह की शीथिलता न की जाए।
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