नगर कोतवाली के पूरे मुस्तफा गांव में 19 परिवार बेघर हो गए हैं। घटना को 24 घंटे बीत गए, मगर अफसरों और प्रशासनिक अफसरों ने बेहाल परिवारों को हाल पूछना भी मुनासिब नहीं समझा। शनिवार को दोपहर में कोटेदार द्वारा अनाज उपलब्ध कराने पर सामूहिक रूप से भोजन बना कर प्रभावित परिवारों ने खाया।
पूरे मुस्तफा में शुक्रवार को घूर की चिंगारी देखते ही देखते शोला बन गई और 19 घरों को जलाकर राख कर दिया। आग ने लालचंद्र, सुरेश, रघुनाथ समेत 19 लोगों के खून पसीने की कमाई पल भर में राख में तब्दील कर दी। अग्निकांड में लाखों रुपये का नुकसान हो गया। मगर हैरत है कि घटना के 24 घंटे बाद भी शनिवार को न तो पीड़ितों के आंसू पोछने के लिए जिले के जिम्मेदारी अधिकारी पहुंचे और न ही इलाके के विधायक व दूसरे जनप्रतिनिधि। चौहान और सरोज बस्ती के अग्निकांड पीड़ितों को रात में भोजन मिल गया लेकिन शनिवार की सुबह खाना नहीं मिला तो बच्चे बेचैन हो उठे।
भूख से बेहाल बच्चों व महिलाओं के लिए सामूहिक रूप से खाना बनाया गया। भूख बर्दाश्त न कर पाने वाले बच्चे खुद ही खाना बनवाने के लिए मदद करने लगे। कोटेदार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को बीस किलो चावल व दो किलो दाल उपलब्ध करा तो दी, लेकिन उसे वे बनाए कहां। घर में लगी आग से बर्तन भी जल गए थे। अपने उजड़े घर को देखकर महिलाओं और बच्चों की आंख से आंसू निकल रहे थे। वे जले सामान की राख में कुछ बचने की उम्मीद में खोजबीन करते रहे। गृहस्थी के सामानों के साथ लोगों के घरों में रखे रुपये भी जल चुके हैं। ऐसे में सभी परिवार के लोगों के सामने आर्थिक समस्या आ गई है।
खैर, ऐसे मौके पर दुखद पहलू ये रहा कि सुख दुख में खड़े रहने का वादा करने वाले जनप्रतिनधि 24 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे। यहां तक कि लेखपाल के अलावा कोई भी प्रशासन का अधिकारी उन लोगों का हाल लेने नहीं पहुंचा। घटना का जिक्र होते ही सभी की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। व्यापार मंडल मोहनगंज के अध्यक्ष फूलचंद्र सोनी ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद प्रदान की है। इसके अलावा पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी सिंह ने अधिकारियों के रवैये की निंदा करते हुए मांग की कि पीड़ितों को गर्मी से बचाने के लिए टेंट की व्यवस्था कराई जाए।
पूरे मुस्तफा निवासी प्रताप बहादुर की बेसहारा नातिन सीमा के पिता की बिलासपुर में मौत हो गई थी। इसके बाद वह अपने ननिहाल में नाना प्रताप बहादुर के यहां रहती थी। नाना ने उसका विवाह जौनपुर में तय कर रखा है। तीन जून को घर पर बारात आनी है। इसके लिए वह पसीना बहाकर तैयारी कर रहा था। दहेज के सामान के साथ रुपये भी संजोकर कच्चे घर में एक बक्से में रखे थे। शुक्रवार को लगी आग ने प्रताप और उसकी नातिन सीमा के सपनों को जलाकर राख के ढेर में तब्दील कर दिया। अब प्रताप के सामने यह समस्या है कि वह नातिन सीमा के हाथ कैसे पीले करेगा। महज दस दिन में शादी के लिए फिर से सामान कहां से एकत्र होगा। यह सोचकर प्रताप व उसके घरवालों का दिल बैठा जा रहा है। प्रताप ने बताया कि रुपये के साथ ही शादी के लिए रखे सामान भी जल गए।