प्रतापगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित कस्तूरबा आवासीय स्कूलों में बगैर टेंडर ही लाखों रुपये की खरीद हो गई। मानक को ताक पर रखकर सामानों की खरीद में अनियमितता बरती गई। जबकि शासन ने बगैर टेंडर खरीद पर रोक लगा रखी है।
जिले के 140 मिडिल स्कूलों में डेस्क-बेंच की खरीद में हुई व्यापक अनियमितता के बाद कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में लाखों रुपये की खरीद बगैर टेंडर के होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कस्तूरबा स्कूलों में विभाग ने बगैर टेंडर निकाले ही वाशिंग मशीन, फ्रिजर, और फर्नीचर की खरीद कर ली। व्यापक पैमाने पर हुई खरीद में स्थानीय ठेकेदारों के बजाए बाहर के ठेकेदारों से कोटेशन लिया गया।
जिले में संचालित 15 कस्तूरबा स्कूलों में सामाग्री खरीद में व्यापक अनियमितता का मामला इन दिनों विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। अफसरों ने खरीद इतने गोपनीय ढंग से की कि विभाग के लोगों को भी जानकारी नहीं मिल पाई। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने कस्तूरबा स्कूलों के निरीक्षण के लिए लखनऊ से आने वाली टीम को सब कुछ ओके दिखाने के लिए खरीदारी की थी, मगर आश्चर्य की बात तो यह रही कि अभी तक शासन से कोई टीम जांच करने नहीं पहुंची।
मूल विभाग में जाने वाला डीसी फिर लौटे
कस्तूरबा आवासीय स्कूलों के डीसी शेखर सुमन को बेसिक शिक्षा विभाग से हटाकर मूल विभाग में वापस कर दिया गया था। मगर ऊंची पहुंच के चलते वह पुन: विभाग में वापस हो गए और डीसी के पद पर तैनात हैं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में जो खरीद हुई है, वह नियम संगत हुई है। अफसरों की टीम आने वाली थी, इसलिए कोटेशन लेकर सामग्री की खरीद की गई है। इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए