प्रतापगढ़। शासन के आदेश के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को न खाना दिया जा रहा है न नाश्ता। जिन ठेकेदारों को मरीजों को सुबह नाश्ता और दोनों मीटिंग खाना परोसने का जिम्मा दिया गया है, वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधीक्षकों की मिलीभगत से मरीजों को कागज पर खाना परोस रहे हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ भी मरीजों से नाश्ता और खाने के बारे में जानकारी लेना उचित नहीं समझते हैं।
शासन ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को नाश्ता और खाना मुहैया कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को दी है। जिले के अस्पतालों में मरीजों को खाना तो दूर नाश्ता तक नहीं दिया जाता है। शासन की ओर से मिलने वाले नाश्ता और खाना के बजट को हजम किया जा रहा है। जबकि शासन की ओर से आदेश दिया गया है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ता में एक मौसमी फल अथवा एक अंडा के साथ दूध दिया जाए। मेन्यू के मुताबिक खाना दिया जाए। अभी तक हर सीएचसी और पीएचसी में मरीजों को खाना परोसने के लिए अलग से ठेकेदारों को जिम्मा सौंपा गया था। ठेकेदार मरीजों के हक पर डाला डाल रहे थे। इसको देखते हुए सीएमओ ने फिर से टेंडर निकाला।
सूत्रों मुताबिक जौनपुर के एक ठेकेदार को जिलेभर के सीएचसी में भर्ती होने वाले मरीजों को नाश्ता और खाना मुहैया कराने की जिम्मेदारी दे दी गई है। मगर ठेकेदार ने खाना मुहैया कराना तो दूर अभी तक अस्पतालों में किचन तक की व्यवस्था नहीं की है। जिला और महिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कागज पर खाना परोसा जा रहा है।
कागज पर 48, हकीकत में चार घंटे के लिए भर्ती होते हैं मरीज
सीएचसी अथवा पीएचसी में कभी-कभार मरीज भर्ती किए जाते हैं। भर्ती होने वाले में ज्यादातर प्रसूता होती हैं। विभाग के सूत्रों के मुताबिक गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पताल यदि आती हैं और समय से उनका प्रसव हो जाता है तो चिकित्सक दवा देकर घर भेज देते हैं। कागज पर प्रसूता को 48 घंटे तक अस्पताल में भर्ती दिखाया जाता है। इस बीच प्रसूता के नाम पर आने वाले नाश्ता और खाना का बजट हजम कर लिया जाता है।
जहां पर खाना नहीं मिल रहा है वहां के लोग शिकायत करें, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
प्रसूता को 48 घंटे तक अस्पताल में रुकने का नियम है। यदि वे नहीं रुकती हैं तो कोई दवाब नहीं बनाया जा सकता है। मरीज को घर जाते समय डॉक्टर को लिखापढ़ी कर लेनी चाहिए। यदि मरीजों को नाश्ता और खाना नहीं दिया जा रहा है या फिर चिकित्सक जानबूझकर भगा दे रहे हैं जो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ठेकेदार के साथ ही अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर सुधाकर पांडेय, एडी, प्रयागराज।