जिले में तीन मॉडल स्कूलों का निर्माण कार्यदायी संस्था की लापरवाही व अनियमितता की भेंट चढ़ गया है। जिले में नजीर के तौर पर खुलने वाले मॉडल स्कूल आठ वर्ष में भी नहीं बने सके। विभागीय अधिकारियों की पहल पर दूसरी कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई, मगर इसके बाद भी निर्माण कार्य में किसी तरह की प्रगति नहीं है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में गुणवत्तापरक शिक्षा की नजीर के तौर पर शासन ने सात मॉडल स्कूलों की सौगात दी थी। जिले के सात ब्लाक इसके लिए चयनित किए गए। जिसमें कालाकांकर, संग्रामगढ़, बाबागंज, आसपुर देवसरा, संडवाचंद्रिका, शिवगढ़ और पट्टी शामिल हैं।
इन स्कूलों में छह से 12 तक की कक्षाएं संचालित होनी थीं। एक मॉडल स्कूल के निर्माण के लिए 3.11 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया। सात मॉडल स्कूलों में कालाकांकर, बाबागंज, आसपुर देवसरा व शिवगढ़ में चार मॉडल स्कूलों का निर्माण हो चुका है। इन सभी विद्यालयों में पढ़ाई हो रही है। मगर अंतू, पट्टी और रामपुर मॉडल स्कूलों का निर्माण करीब आठ वर्षों से अधर में लटका पड़ा है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उप्र राजकीय निर्माण निगम को दी गई थी।
अंतू, पट्टी व रामपुर में निर्माण कार्य की शुरुआत में अनियमितता की शिकायत की गई। ग्रामीणों ने विरोध शुरू किया तो अधिकारियों ने जांच शुरू की। जांच में पोल खुलने पर कार्यदायी संस्था के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद निर्माण कार्य अटक गया। करीब सात साल बाद उप्र राजकीय निर्माण निगम की वाराणसी इकाई को निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बताया जा रहा है कि संस्था द्वारा निर्माण कार्य जारी है, मगर हकीकत तो यह है कि निर्माण कार्य में अभी भी लापरवाही हो रही है।
अब तक किसी तरह की प्रगति नहीं देखी जा रही है। उधर, विभाग का दावा है कि अप्रैल माह में इन स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी आरएन तिवारी ने बताया कि निर्माण कार्य नए सत्र के पहले पूरा करने के लिए निर्देशित किया है। कार्य जारी है। संभावना है कि नए सत्र में मॉडल स्कूलों का संचालन शुरू हो जाएगा।