जिला कारागार में मारपीट और बवाल के बाद भूख हड़ताल पर बैठे बंदी मान गए हैं। उन्होंने बुधवार से भोजन लेना शुरू कर दिया। पुलिस की पिटाई से घायल चार बंदियों का जिला कारागार के अस्पताल में इलाज चल रहा है। बुधवार को बंदियों से मुलाकात करने वाले परिजनों को गेट पर सघन चेकिंग के बाद भीतर जाने दिया गया। जिससे उन्हें आधे घंटे विलंब से जेल में प्रवेश मिला।
जिला कारागार में निरुद्ध दबंग बंदियों की करतूत की सजा सभी बंदियों को भुगतनी पड़ रही है। पुलिस व जेल के बंदीरक्षकों की पिटाई से घायल चार बंदियों का उपचार अस्पताल में चल रहा है। अन्य बंदियों को उनकी बैरकों में भेज दिया गया। जेल में बवाल और मारपीट की घटना को लेकर भूख हड़ताल पर रहे दो व नौ नंबर बैरक के बंदियों ने बुधवार से खाना शुरू कर दिया।
जिसके बाद जेल प्रशासन ने राहत की सांस ली। पेशी पर आए बंदियों की मानें तो जेल के दबंग बंदी मोबाइल का प्रयोग करते हैं। जब बैरकों की जांच शुरू होती है तो दूसरे बंदियों के ठिकानों में मोबाइल समेत दूसरी प्रतिबंधित सामग्री छिपा देते हैं। उनकी सजा सभी बंदियों को भुगतनी पड़ती है।
बुधवार को बंदियों से मिलने के लिए पहुंचे परिवार के लोगों को सघन जांच से गुजरना पड़ा। पीएसी की मौजूदगी में मुलाकात करने वाले लोगों के सामानों की तलाशी ली गई । इसके चलते आधे घंटे विलंब से परिवार के लोग बंदियों से मिल सके। प्रभारी जेल अधीक्षक आरपी चौधरी का दावा है कि सभी बंदी खाना खा रहे हैं। जेल मैनुअल का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्थ पैदा न हो सके।
उपद्रवी बंदियों पर जेल प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में
जेल प्रशासन उपद्रवी बंदियों को चिह्नित करने में जुट गया है। ऐसे बवाली बंदियों को दूसरे जनपद की जेलों में भेजा जाएगा, ताकि जेल में शांति व्यवस्था बनी रहे।
पॉलीथिन वाला सामान रखवाया गया बाहर
जेल में बंदियों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में परिजन बुधवार को आए हुए थे। मुलाकात के लिए लोग अंगूर, सेब, संतरा समेत अन्य खाद्य पदार्थ पॉलीथिन में रखकर ले जा रहे थे जिसे बाहर करा दिया गया। जेल गेट पर लगी पीएसी को अलर्ट रही।
कोतवाली पुलिस भी रख रही नजर
जिला कारागार में बंदियों के बवाल को देखते हुए कोतवाली पुलिस भी बराबर जेल पर नजर रख रही है। बुधवार की सुबह भी पुलिसकर्मी जेल के बाहर हालात जानने के लिए पहुंचे।